Saraswati Shishu Mandir चिटनिस की गोठ, गोरखी में शिशु नगरी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ
ग्वालियर। सरस्वती शिशु मंदिर चिटनिस की गोठ, गोरखी में शिशु नगरी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभा, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा” के साथ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अमर सत्य गुप्ता, संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, ग्वालियर–चंबल संभाग रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुमित तिवारी, सचिव, सरस्वती शिक्षा समिति ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में संदीप शर्मा, व्यवस्थापक विद्यालय प्रबंध समिति, मुकुट बिहारी शर्मा, विभाग समन्वयक एवं माधुरी गोलवलकर, प्राचार्य गोरखी विद्यालय उपस्थित रहीं। अतिथियों का परिचय विद्यालय के प्राचार्य सुरेंद्र सिंह मौर्य द्वारा कराया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन अर्चना फड़नीस ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पण कर किया गया। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत श्रीफल, स्मृति चिन्ह, शॉल, चंदन एवं अक्षत भेंट कर किया गया। मुख्य अतिथि अमर सत्य गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज भारत पुनः विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है और इसमें अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो अपने बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा के लिए सरस्वती शिशु मंदिर में अध्ययन करा रहे हैं।
कार्यक्रम में विद्यालय के भैया-बहनों द्वारा कुल तेरह सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। इसके बाद “माँ के बराबर कोई नहीं”, “टन-टन घंटी बजी”, “राम सिया राम, जय जय राम” और “बेटी हमारी अनमोल” जैसे भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किए गए। नन्हे-मुन्ने शिशु कक्षा के बच्चों की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। विभाग समन्वयक मुकुट बिहारी शर्मा ने कहा कि शिक्षा अन्य विद्यालयों में भी दी जाती है, लेकिन संस्कार और संस्कृति आधारित शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिरों में ही प्राप्त होती है। उन्होंने “माता शत्रु पिता बैरी” श्लोक के माध्यम से माता-पिता की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में शिशु वाटिका के अरुण, उदय, प्रभात, प्रथम एवं द्वितीय वर्ग के विद्यार्थियों को ड्राइंग और प्रोजेक्ट कार्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन माधुरी गोलवलकर द्वारा किया गया। अंत में कल्याण मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। संपूर्ण कार्यक्रम संस्कार, संस्कृति एवं राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत रहा, जिसकी उपस्थित अभिभावकों एवं जनसमूह ने सराहना की।
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