सत्ता की रेस में Tarique Rahman की बीएनपी सबसे आगे, सुधारों के लिए जनमत पर टिकी यूनुस की उम्मीदें
ढाका। बांग्लादेश में आम चुनाव के करीब आते ही राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुआई में चल रही अंतरिम सरकार के बीच अब देश को एक पूर्णकालिक प्रधानमंत्री मिलने की उम्मीद है। यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक है, क्योंकि लंबे समय तक सत्ता में रही शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग इस बार चुनावी प्रक्रिया से बाहर है, जिसे प्रतिबंधित कर दिया गया है। ऐसे में चुनावी मैदान अब नई और पुरानी भारत विरोधी ताकतों के लिए पूरी तरह खुला नजर आ रहा है। मौजूदा चुनावी परिदृश्य में मुख्य मुकाबला दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के बीच माना जा रहा है। जहां एक तरफ जमात-ए-इस्लामी का पूरा एजेंडा भारत विरोध और अल्पसंख्यकों के खिलाफ केंद्रित रहता है, वहीं तारिक रहमान की बीएनपी भी अपने भारत विरोधी रुख के लिए जानी जाती है। लंबे समय तक ब्रिटेन में निर्वासित जीवन बिताने के बाद तारिक रहमान की स्वदेश वापसी ने उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। हाल ही में सामने आए चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के नतीजे बीएनपी के लिए बेहद उत्साहजनक दिखाई दे रहे हैं। सर्वे के मुताबिक, बांग्लादेश की 350 सीटों वाली संसद में बीएनपी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर सकती है।
अनुमानों के अनुसार, बीएनपी को 200 से अधिक सीटें मिलने की संभावना है, जिससे तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। दूसरी ओर, शफीकुर्रहमान के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही जमात-ए-इस्लामी की स्थिति बहुत मजबूत नहीं मानी जा रही है। सर्वे बताता है कि जमात 50 के आसपास सीटें जीत सकती है और मुख्य विपक्ष की भूमिका निभा सकती है। इसके अलावा जातीय पार्टी को महज 3 सीटें मिलने और बाकी सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों के जीतने का अनुमान है। चुनावों के साथ ही 12 फरवरी को एक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया होने जा रही है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने आम चुनाव के साथ ही देश में एक जनमत संग्रह कराने का निर्णय लिया है। यूनुस ने वरिष्ठ सचिवों और शीर्ष नौकरशाहों को संबोधित करते हुए जनता से उनके प्रस्तावित 84-सूत्रीय सुधार पैकेज के पक्ष में हां में वोट देने की अपील की है। उनका मानना है कि यदि जनता इस सुधार पैकेज का समर्थन करती है, तो देश से कुशासन को जड़ से मिटाने और एक सकारात्मक भविष्य के निर्माण में मदद मिलेगी। बांग्लादेश की चुनावी प्रणाली के अनुसार, संसद की कुल 350 सीटों में से 300 पर जनता सीधे मतदान करती है, जबकि 50 सीटें आरक्षित श्रेणी के तहत चुनी जाती हैं। भारत की तरह ही यहां भी सांसदों का कार्यकाल पांच वर्षों का होता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बांग्लादेश की जनता तारिक रहमान के हाथों में देश की कमान सौंपती है और क्या मोहम्मद यूनुस के सुधारों को जनमत संग्रह में हरी झंडी मिलती है।
Comment / Reply From
You May Also Like
Popular Posts
Newsletter
Subscribe to our mailing list to get the new updates!