असाधारण साहस और इच्छाशक्ति से राष्ट्रमंडल खेलों तक पहुंचे Shubham
ग्लासगो। राष्ट्रमण्डल खेलों की शॉट पुट स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले पैरा एथलीट शुभम जुयाल का पोडियम तक का सफर आसान नहीं रहा है। शुभम की ये उपलब्धि उनके असाधारण साहस और इच्छाशक्ति को दिखाती है, क्योंकि ठीक चार साल पहले वह जिंदगी की जंग लड़ रहे थे। तब वह आईसीयू में थे। उस दिन उनका एक पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा था और इससे उनका भारतीय सेना में शामिल होने का सपना तक टूट गया था। इससे जुयाल को ऐसा लग रहा था जैसे जिंदगी बुरी तरह थम गई हो। वहीं अब उनके पास एक रजत है। अपनी इस यात्रा को याद करते हुए जुयाल ने से कहा, यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि ठीक चार साल पहले, 1 अगस्त को मैं आईसीयू में था। मेरा पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा था और उस समय मैं पूरी तरह से निराश और बिना किसी मकसद के था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि चार साल बाद मैं राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लूंगा, रजत पदक जीतने की तो बात ही छोड़िए। जिंदगी बदलने वाले उस हादसे से पहले जुयाल का एकमात्र मकसद भारतीय सेना में सेवा करना था। 26 साल की उम्र में उन्होंने आर्मी कैडेट कॉलेज एंट्री स्कीम के लिए लिखित परीक्षा पास की थी और प्रतिष्ठित एसएसबी इंटरव्यू से बस एक हफ्ता दूर थे, तभी एक गंभीर मोटरसाइकिल दुर्घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। उन्होंने याद करते हुए कहा, चार साल पहले, मेरा मकसद आर्मी ऑफिसर बनना था। मुझे नहीं पता था कि हादसे के बाद मैं जिंदगी में क्या करूंगा।
जुयाल की जिंदगी में अहम मोड़ 2023 में आया जब वे आर्मी पैरालंपिक नोड में शामिल हुए। वहीं उनकी मुलाकात सूबेदार मेजर आर के सिंह रावत से हुई, जिन्होंने उनकी किस्मत बदलने में मदद की। उस समय, जुयाल का पैरा-एथलेटिक्स में कोई अनुभव नहीं था। जुयाल ने माना, मुझे शॉट पुट के बारे में शून्य जानकारी थी। लेकिन मेरे कोच ने मुझे प्रेरित किया और सब कुछ सिखाया। उन्होंने बताया कि इंडियन आर्मी, उनके परिवार और उनके दोस्तों ने इस पूरे सफर में उनका बहुत साथ दिया, जो उनकी वापसी में महत्वपूर्ण साबित हुआ। राष्ट्रमंडल खेलों में जीता गया यह रजत पदक शुभम जुयाल के लिए भविष्य की बड़ी कामयाबियों की महज शुरुआत है। उनकी नजर अब 2028 लॉस एंजिल्स पैरालंपिक्स में स्वर्ण पदक जीतने पर है। जुयाल ने अपनी महत्वाकांक्षा व्यक्त करते हुए कहा, यह एक लंबा सफर है, लेकिन मुझे लगता है कि इसकी शुरुआत अभी हुई है। अभी और भी कई पदक जीतने शेष हैं। मेरा लक्ष्य 2028 के पैरालंपिक्स में स्वर्ण पदक जीतना है। उनका यह सफर दिखाता है कि दृढ़ संकल्प और अटूट संकल्प से कोई भी बाधा दूर की जा सकती है।
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