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पाकिस्‍तानी नरसंहार को भूल नहीं रहे Tariq Rehman, भारत विरोधी यूनुस की दोस्‍ती पर फेरा पानी

पाकिस्‍तानी नरसंहार को भूल नहीं रहे Tariq Rehman, भारत विरोधी यूनुस की दोस्‍ती पर फेरा पानी

ढाका। बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने पाकिस्तानी सेना द्वारा 1971 में किए गए नरसंहार को याद कर पाकिस्तान और उसके समर्थकों को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि तब पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई इतिहास के सबसे घृणित नरसंहारों में से एक थी और इस नरसंहार को कभी: भुलाया नहीं जा सकता। पीएम तारिक ने विशेष रूप से ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान निहत्थे बांग्लादेशियों की हत्याओं को याद कर “पूर्व नियोजित नरसंहार” बताया। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि बांग्लादेश पाकिस्तान से माफी की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि पाकिस्तान पुरानी आपसी संधियों से हल हो चुका मानता है। बात दें कि तारिक रहमान के पिता जिआ उर रहमान ने भी तब पाकिस्तानी सेना के खिलाफ विद्रोह किया था। 27 मार्च 1971 को उन्होंने कालूरघाट रेडियो स्टेशन से बांग्लादेश की आजादी का ऐलान किया और बाद में मुक्ति युद्ध में प्रमुख कमांडर की भूमिका निभाई। तारिक रहमान ने लोगों से अपील की कि वे स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को बनाए रखें और देश को लोकतांत्रिक बनाएं। इस बीच, पूर्व प्रधानमंत्री और नोबेल विजेता मोहम्‍मद युनूस ने शेख हसीना के भारत में शरण लेने के बाद पाकिस्तान के साथ मित्रता बढ़ाने की कोशिश की थी। युनूस ने सत्ता में रहते हुए पाकिस्तानी सेना के नरसंहार को नजरअंदाज कर उच्च सैन्य अधिकारियों को इस्लामाबाद भेजा और दोनों देशों ने कुछ वर्षों बाद सचिव स्तर पर बातचीत की। उन्होंने सार्क के संचालन में तेजी लाने की पहल की, जिसका भारत विरोध करता रहा। लेकिन बांग्लादेश में बीएनपी की सरकार अब तारिक रहमान के नेतृत्व में आ चुकी है, जो पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर व्यावहारिक दृष्टिकोण दिखा रही है।

शेख हसीना पाकिस्तान से दूरी बनाए रखती थीं, जबकि बीएनपी की दिवंगत नेता खालिदा जिया पाकिस्तान के साथ मित्रता रखती थीं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने 2025 को दोनों देशों के संबंधों में टर्निंग पॉइंट बताया और बांग्लादेश-पाकिस्तान को ‘भाई’ करार दिया। हालांकि, तारिक रहमान का स्पष्ट रुख यह दर्शाता है कि 1971 के नरसंहार को भूलना या माफ करना उनके लिए अस्वीकार्य है, और यह बांग्लादेश-पाकिस्तान संबंधों में तनाव की बड़ी वजह बना हुआ है। बयान और राजनीतिक स्थिति से यह साफ है कि बांग्लादेश अपनी स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और न्याय के लिए स्थिर रुख बनाए रखना चाहता है, जबकि पाकिस्तान के साथ संबंधों में सुधार केवल तभी संभव होगा जब वे ऐतिहासिक घटनाओं को स्वीकार और माफी करें। मोहम्मद यूनुस पाकिस्‍तान से कर रहे थे दोस्‍ती वहीं अब तारिक रहमान की बीएनपी सत्‍ता में आ गई है जो दशकों से पाकिस्‍तान के साथ संबंधों को लेकर व्‍यवहारिक रवैया अपनाती रही है। शेख हसीना ने जहां पाकिस्‍तान से दूरी बना रखी थी, वहीं बीएनपी की द‍िवंगत नेता खालिदा जिया पाकिस्‍तान के साथ रिश्‍ते रखती थीं। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने दावा किया था कि साल 2025 पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश के बीच रिश्‍ते में टर्निंग प्‍वाइंट साबित हुआ है। उन्‍होंने कहा कि इस साल में रिश्‍ते में जमी बर्फ पिघली है। डार ने पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश को भाई करार दिया था। शहबाज शरीफ और मोहम्‍मद युनूस के बीच कई बार व‍िभिन्‍न मंचों पर मुलाकात भी हुई थी। युनूस ने जोर दिया था कि बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान अपने दशकों से चल रहे विवाद को खत्‍म करें।

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