किसी भी महिला की खूबसूरती उसके चेहरे तक सीमित नहीं होती: Isha Koppikar
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर का कहना है कि मनोरंजन जगत में पुरुष कलाकारों की बढ़ती उम्र को अनुभव और परिपक्वता का प्रतीक माना जाता है, जबकि महिलाओं की उम्र बढ़ने को अक्सर नकारात्मक नजरिए से देखा जाता है। अभिनेत्री ने आगे कहा कि इस सोच में बदलाव की जरूरत है और महिलाओं का सम्मान उनकी उम्र नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और जीवन के अनुभवों के आधार पर होना चाहिए। अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर ईशा कोप्पिकर ने साझा किए एक वीडियो में कहा कि फिल्मों में अक्सर बड़े उम्र के अभिनेता अपने से काफी कम उम्र की अभिनेत्रियों के साथ रोमांटिक भूमिका निभाते हैं और इसे पूरी तरह सामान्य माना जाता है। लेकिन यदि कोई महिला आत्मविश्वास के साथ अपनी पहचान जीती है, स्टाइलिश रहती है और खुलकर अपनी बात रखती है, तो उसे यह कहकर टोक दिया जाता है कि अब उसकी उम्र हो गई है और उसे उसी के अनुसार व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय के साथ महिला कमजोर नहीं होती, बल्कि उसका आत्मविश्वास, अनुभव और समझ पहले से अधिक मजबूत हो जाती है। उनके अनुसार किसी महिला की खूबसूरती केवल उसके चेहरे तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके जीवन के अनुभव, संघर्ष और उपलब्धियां भी उसकी वास्तविक पहचान होती हैं। चेहरे पर आने वाली झुर्रियां केवल उम्र का संकेत नहीं देतीं, बल्कि जीवन के लंबे सफर और संघर्षों की कहानी भी बयां करती हैं।
अभिनेत्री ने कहा कि हर व्यक्ति की तरह महिलाओं का भी उम्र बढ़ना स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि मां, पत्नी, बहन, बेटी या किसी भी महिला की बढ़ती उम्र को अपमान या कमजोरी का विषय नहीं बनाना चाहिए। हर महिला का सम्मान उसकी ताकत, अनुभव और आत्मविश्वास के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सम्मान की कोई समाप्ति तिथि नहीं होती और आत्मविश्वास की भी कोई उम्र नहीं होती। ईशा कोप्पिकर ने अपनी पोस्ट के कैप्शन में लिखा कि दुनिया ने लंबे समय तक सुंदरता को उम्र से जोड़कर देखा है, जबकि वास्तविक सुंदरता का उम्र से कोई संबंध नहीं होता।
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