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  • Thursday, 30 April 2026
Vijay क्या केजरीवाल जैसी सफलता हासिल करेंगे या प्रशांत की तरह होगा हश्र?

Vijay क्या केजरीवाल जैसी सफलता हासिल करेंगे या प्रशांत की तरह होगा हश्र?

तमिलनाडु विधानसभा के एग्जिट पोल के नतीजों ने छेड़ दी राजनैतिक बहस

नई दिल्ली। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ गए हैं। इन अनुमानों ने तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) को लेकर सबसे दिलचस्प सवाल खड़ा हो गया है कि क्या विजय थलपति दिल्ली में अरविंद केजरीवाल जैसी बड़ी सफलता हासिल करने वाले हैं या फिर उनका हश्र प्रशांत किशोर के बिहार प्रयोग जैसा होगा। इसका जवाब, कम से कम आज के लिए इस बात पर निर्भर करता है कि कोई किस एग्जिट पोल पर भरोसा कर रहा है। ज्यादातर अनुमान टीवीके को 10–24 सीटें मिलने का लगा रहे हैं, जो कि एक शानदार शुरुआत है। ज्यादातर एक्जिट पोलों के मुताबिक विजय की पार्टी मुख्य दावेदार होने के बजाय खेल बिगाड़ने की भूमिका में हो सकती है। कुछ पोलों ने टीवीके के लिए 10–12 सीटों का अनुमान लगाया है, जबकि पीपुल्स प्लस इसे 18–24 सीटों के साथ ज्यादा मजबूत स्थिति में बता रहा है। एग्जिट पोल्स के नतीजे बता रहे हैं कि शहरी और युवा वोटरों के बीच विजय की पार्टी की अच्छी पकड़ है। इस स्थिति में विजय की पार्टी मौजूदा सरकार के खिलाफ पड़ने वाले वोटों को बांट सकती है, जिससे परोक्ष रूप से डीएमके को फायदा हो सकता है, लेकिन एक ऐसा अनुमान भी सामने आया जो सबसे अलग है। एक्सिस माय इंडिया ने टीवीके की सीटों में जबरदस्त उछाल का अनुमान लगाया है, जिसके मुताबिक विजय की पार्टी को 98–120 सीटें मिल सकती हैं। अगर 4 मई को ये आंकड़े सच साबित होते हैं, तो विजय रातों-रात तमिलनाडु की राजनीति के केंद्र में आ जाएंगे।

ऐसा होने पर विजय, केजरीवाल की लीग में शामिल हो जाएंगे। एक ऐसा नया चेहरा जो न सिर्फ अपनी जगह बनाता है, बल्कि राज्य की राजनीति का केंद्र बन जाता है और विजय के पास अपनी सुपरस्टार थलाइवर वाली छवि भी है। एक ऐसी चीज जो तमिलनाडु में सालों से काम करती आई है, जैसा कि एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता के उभार के समय देखा गया था। हालांकि 2013 के दिल्ली चुनाव के विपरीत जहां केजरीवाल सिर्फ भ्रष्टाचार-विरोधी लहर के सहारे आगे बढ़े थे तमिलनाडु का चुनावी मुकाबला काफी पेचीदा है, यह द्रविड़ राजनीति, मजबूत पार्टी तंत्र और दशकों पुरानी मतदाताओं की वफादारी में गहराई से जुड़ा हुआ है। टीवीके का अच्छा प्रदर्शन भी सत्ता नहीं दिला सकता, जब तक कि वह अपनी लोकप्रियता को बूथ-स्तर तक न पहुंचा दे। एक ऐसा क्षेत्र जहां डीएमके और अन्नाद्रमुक जैसे स्थापित खिलाड़ियों को स्पष्ट बढ़त हासिल है। अगर टीवीके का प्रदर्शन अनुमानों के निचले दायरे में ही रहता है, तो भी वह सत्ता के लिए तत्काल चुनौती पेश किए बिना, वोटों के हिस्से और भविष्य के गठबंधनों को बदलने में कामयाब हो सकता है। तो क्या विजय अगले ऐसे बाहरी नेता हैं जो अपनी लहर को जनादेश में बदल सकते हैं, जैसा कि कभी केजरीवाल ने किया था? या फिर वह भी किशोर की शुरुआती राजनीतिक कोशिशों की तरह कोई खास असर छोड़ने में नाकाम रहेंगे? इस सवाल का जवाब तो 4 मई को ही साफ हो पाएगा।

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