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  • Thursday, 10 September 2026
तीन आसियान देशों ने भारत के BrahMos खरीदने किए समझौते, चीन के लिए बनेंगे काल

तीन आसियान देशों ने भारत के BrahMos खरीदने किए समझौते, चीन के लिए बनेंगे काल

  • इस खतरनाक मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर में प्रदर्शन के बाद दुनिया का ध्यान खींचा

नई दिल्ली। ब्रह्मोस खरीदने के लिए तीन आसियान देशों ने भारत के साथ समझौते किए हैं। चौथा देश थाईलैंड भी इसे खरीदने पर विचार कर रहा है। भारत इसी मिसाइल की मदद से चीन को घेरने की तैयारी कर रहा है। भारत दक्षिण चीन सागर में अपनी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की पहुंच बढ़ा रहा है। एक इंटरव्यू में लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर (रिटायर्ड) ने इसकी पुष्टि की है। हालांकि उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस वाली इस रणनीति का मकसद सिर्फ चीन को निशाना बनाना नहीं बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत सुरक्षा घेरा बनाना है।


बता दें अपनी श्रेणी की सबसे तेज क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने शानदार प्रदर्शन के बाद दुनिया का ध्यान खींचा है। इस दौरान जब भारत ने पाकिस्तानी एयर बेस पर हमला किया तो इसकी सटीकता और लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता का पता चला। ब्रह्मोस के कारण ही पाकिस्तान को युद्धविराम के लिए मजबूर होना पड़ा था। पिछले एक साल में वियतनाम और इंडोनेशिया ने भारत के साथ ब्रह्मोस के लिए समझौते किए हैं। मलेशिया और थाईलैंड भी इसमें शामिल हो सकते हैं।


बता दें 2022 में फिलीपींस ने अपनी तटीय सुरक्षा के लिए 37.5 करोड़ डॉलर में ब्रह्मोस खरीदने वाला पहला देश बना। ये सभी देश विवादित दक्षिण चीन सागर के आसपास स्थित हैं। उन्हें चीन के आक्रामक और तेजी से बढ़ते दबदबे का सामना करना पड़ता है। लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर ने कहा कि ब्रह्मोस बेल्ट रणनीति से भारत-चीन संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि इससे चीन को निश्चित रूप से यह एहसास होगा कि उसका सामना एक मजबूत भारत से हो रहा है। उन्होंने कहा कि चीन ने देखा है कि ब्रह्मोस कैसे काम करती है। दक्षिण चीन सागर में चीन अपनी अधिकतम रेंज पर काम कर रहा है।


दक्षिण-पूर्व एशिया के और देश ब्रह्मोस एंटी शिप मिसाइलें हासिल कर रहे हैं। तो स्थिति बदलने लगी है। वियतनाम के साथ डील करीब 5900 करोड़ रुपए की है, जबकि इंडोनेशिया ने 1900 करोड़ की कीमत वाली दो ब्रह्मोस खरीदने का फैसला किया है। अगर थाईलैंड जैसे और देश भी यह मिसाइल हासिल करते हैं तो नतीजा यह होगा कि एशिया के कुछ सबसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ब्रह्मोस की एक चेन बन जाएगी। विशेषज्ञ इसे भारत की एक चालाक चाल के तौर पर देख रहे हैं। इससे दक्षिण चीन सागर में कोई सैनिक या जहाज भेजे बिना ही चीन की चिंताएं बढ़ गई हैं। बता दें 290 किमी तक की उड़ान रेंज वाली यह फायर-एंड-फॉरगेट मिसाइल जमीन, जहाज या लड़ाकू विमान से लॉन्च की जा सकती है। इसे रोकना असंभव है। ब्रह्मोस भारत के लिए गेम चेंजर साबित हुई। चीन का कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम ब्रह्मोस को रोक नहीं सकता। ब्रह्मोस की रफ्तार और सटीक निशाना लगाने की क्षमता चीनी जहाजों के लिए बड़ा खतरा है। इससे चीन को विवादित इलाकों से दूर रहने पर मजबूर होना पड़ सकता है।

 

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