College फेस्ट में भक्ति के पारंपरिक सुरों से जुड़ी नई पीढ़ी
- कविता पौडवाल के ‘कीर्तन क्लब’ की प्रस्तुति में करीब 40 कॉलेजों के विद्यार्थी शामिल; आरती, भजन और गोंधल के साथ गणेशोत्सव की रंगत
मुंबई। गणेशोत्सव की पारंपरिक भक्ति जब कॉलेज फेस्ट के मंच पर नए अंदाज में पहुंची तो नई पीढ़ी भी उससे जुड़ती नजर आई। एसएनडीटी कॉलेज में 8 सितंबर को कविता पौडवाल के ‘कीर्तन क्लब’ की प्रस्तुति में करीब 40 कॉलेजों के विद्यार्थी शामिल हुए। ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के बीच विद्यार्थियों ने भजन गाए, तालियां बजाईं और संगीत पर झूमते हुए कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘सुखकर्ता दुखहर्ता’ से हुई। इसके बाद गणपति आरती, ‘मोरया रे बाप्पा मोरया’ जैसे लोकप्रिय जयघोष और महाराष्ट्र की पारंपरिक लोक-भक्ति शैली गोंधल की प्रस्तुति हुई। विद्यार्थियों ने सामूहिक गायन और तालियों के जरिए प्रस्तुतियों में भाग लिया। कार्यक्रम में Gen Z के साथ Gen Alpha की भी भागीदारी रही।
:: भक्ति के पारंपरिक रूप को मिला नया मंच ::
आयोजन में कीर्तन, आरती, भजन और लोक-भक्ति परंपराओं को पारंपरिक धार्मिक आयोजन से आगे कॉलेज के सांस्कृतिक मंच पर सहभागी रूप में प्रस्तुत किया गया। ‘कीर्तन क्लब’ के माध्यम से इन परंपराओं को युवाओं और समकालीन सांस्कृतिक आयोजनों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। गणेशोत्सव ने इस जुड़ाव को सहज बनाया। भक्ति और संगीत के साथ सामूहिक उत्सव के माहौल में विद्यार्थी दर्शक बने रहने के बजाय गायन और तालियों के जरिए प्रस्तुति का हिस्सा बने। एसएनडीटी परिसर में गूंजते गणपति जयघोष के बीच कार्यक्रम संपन्न हुआ।
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