Iran पर हमले की पूरी तैयार कर रहे ट्रंप, सामने आया युद्धपोत भेजने के पीछे का कारण
वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनातनी अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि कर दी है कि वे अपने सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर, यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड, को पूरे सैन्य साजो-सामान के साथ मध्य एशिया भेज रहे हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की खबरें आती रही हैं, लेकिन धरातल पर बढ़ता सैन्य जमावड़ा किसी बड़े टकराव की आशंका को जन्म दे रहा है। जब राष्ट्रपति ट्रंप से यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड की रवानगी को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि यह युद्धपोत कुछ ही समय में रवाना होने वाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान के साथ परमाणु समझौते पर कोई ठोस सहमति नहीं बनती है, तो अमेरिका को इस सैन्य शक्ति की आवश्यकता पड़ेगी। रिपोर्टों के अनुसार, केवल गेराल्ड ही नहीं, बल्कि यूएसएस अब्राहम लिंकन को भी सक्रिय कर दिया गया है, जो इस अभियान में अहम भूमिका निभाएगा। हाल के महीनों में ईरान के भीतर हुए विरोध प्रदर्शनों और वहां की सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों के दमन ने आग में घी डालने का काम किया है। अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम नहीं लगाता और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन नहीं करता, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। तनाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अरब सागर में तैनात गाइडेड मिसाइल से लैस यूएसएस अब्राहम लिंकन ने पिछले ही सप्ताह ईरान के एक ड्रोन को मार गिराया था। यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड इससे पहले वेनेजुएला में एक विशेष अभियान को अंजाम दे रहा था। वहां से इसे सीधे मध्य एशिया की ओर मोड़ दिया गया है।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ओमान में दोनों देशों के बीच हुई वार्ता के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल सका है, जिसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य विकल्प को प्राथमिकता देने के संकेत दिए हैं। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, यह तैनाती ईरान के साथ परमाणु वार्ता में आए गतिरोध और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच वाशिंगटन की सैन्य क्षमता के प्रदर्शन के तौर पर देखी जा रही है। अब फारस की खाड़ी और अरब सागर में एक साथ दो शक्तिशाली विमानवाहक पोतों (यूएसएस गेराल्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन) की मौजूदगी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभूतपूर्व नौसैनिक जमावड़ा ईरान पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव को चरम पर ले जाने की रणनीति का हिस्सा है। यह बड़ा कदम राष्ट्रपति ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई लंबी चर्चा के बाद उठाया गया है। बताया जा रहा है कि ओमान में तेहरान के साथ चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता के बेनतीजा रहने से वाशिंगटन असंतुष्ट है। इस बेड़े में विमानवाहक पोतों के अलावा गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक और आधुनिक निगरानी विमान भी शामिल हैं, जो पूरे क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।
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