Global Change: चीन का इनविजिबल हंटर और सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान बेनकाब
बीजिंग। दुनिया अब पारंपरिक युद्ध और हथियारों के दौर से निकलकर भविष्य की स्पेस वॉर और अत्याधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रही है। चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे विनाशकारी हथियार को विकसित करने का दावा किया है, जिसमें बारूद या मिसाइलों का इस्तेमाल नहीं होता। इसे ‘हाई-पावर माइक्रोवेव’हथियार या ‘इनविजिबल हंटर’कहा जा रहा है। चीनी शोधकर्ताओं का दावा है कि यह प्रणाली अंतरिक्ष में तैनात उपग्रहों, विशेष रूप से एलन मस्क के ‘स्टारलिंक’ नेटवर्क को पूरी तरह निष्क्रिय या नष्ट करने में सक्षम है। इस हथियार को ‘स्टारलिंक किलर’भी कहा जा रहा है। चीन का मानना है कि ताइवान के साथ किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में स्टारलिंक सैटेलाइट अमेरिका और उसके सहयोगियों को संचार और निगरानी में निर्णायक बढ़त दिला सकते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में स्टारलिंक की प्रभावी भूमिका को देखते हुए चीन ने 20 गीगावॉट शक्ति वाले इस कॉम्पैक्ट ड्राइवर को विकसित किया है। यह अदृश्य शिकारी जमीन, समुद्र या हवा कहीं से भी संचालित किया जा सकता है और बिना किसी धमाके के दुश्मन के उपग्रहों को डिलिंक कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक युद्ध के मैदान में अमेरिका की संचार शक्ति को पंगु बनाने की क्षमता रखती है। एक तरफ तकनीक की दुनिया में चीन की चुनौती बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर बेनकाब हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति की नवीनतम रिपोर्ट ने दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए विस्फोट के तार सीधे तौर पर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जोड़े हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, जैश ने पिछले साल 10 नवंबर को हुए इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि जैश प्रमुख मसूद अजहर ने महिलाओं की एक विशेष शाखा ‘जमात-उल-मोमिनात’ बनाने की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य आतंकी गतिविधियों को समर्थन देना है। रिपोर्ट में विरोधाभासी स्थितियां भी दिखीं, जहाँ एक ओर जैश हमलों की जिम्मेदारी ले रहा है, वहीं दूसरी ओर एक सदस्य देश ने इसे निष्क्रिय बताया, जिसे पाकिस्तान द्वारा फैलाया गया भ्रम माना जा रहा है। रिपोर्ट में 28 जुलाई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले का भी जिक्र है। इस हमले के बाद भारत ने सीमा पार आतंकी ढांचों पर प्रेसिजन स्ट्राइक के जरिए सटीक प्रहार किए थे। भारतीय सेना की इस कार्रवाई में जैश और लश्कर के कई ठिकाने नष्ट हुए और कई बड़े आतंकी मारे गए। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह आत्मरक्षा में किसी भी हद तक जाने को तैयार है। 1990 के दशक से अल-कायदा से संबंधों के कारण जैश और लश्कर पर वैश्विक प्रतिबंध लागू हैं, फिर भी नई भर्तियों और शाखाओं की घोषणा यह दर्शाती है कि पड़ोसी देश की सरजमीं पर आतंकी तंत्र अभी भी सक्रिय है। दिल्ली के लाल किले के पास हुआ हमला भारत की संप्रभुता को चुनौती देने का प्रयास था, जिसे अब संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर पुख्ता कर दिया है।
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