दिग्गज निवेशक Mark Mobius ने दुनिया को कहा अलविदा, नाइट क्लब में बजाते थे पियानो
70 से ज्यादा देशों में निवेश की संभावनाएं तलाशीं, रुपया नहीं खूब नाम कमाया, नहीं की शादी
सिंगापुर। निवेश की दुनिया के दिग्गज मार्क मोबियस का बुधवार को सिंगापुर में निधन हो गया। उन्होंने भारत को हमेशा निवेश के लिए मुफीद जगह बताया और उसकी ग्रोथ की सराहना करते रहे। मार्क ने दुनिया के 70 से ज्यादा देशों में निवेश की संभावनाएं तलाशीं जिसकी वजह से उन्हें उभरती अर्थव्यवस्थाओं का इंडियाना जोंस कहा जाने लगा। आज उनका नाम भले ही दिग्गज और दूरदर्शी निवेशक के तौर पर जाना जाता हो, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब वह अपना खर्च चलाने के लिए नाइट क्लब में पियानो बजाते थे। जानकारी के मुताबिक मार्क का पूरा नाम जोसेफ बर्नहार्ड मार्क मोबियस है और उनका जन्म अमेरिका के लॉग आइैलैंड स्थित बेलमोर में 17 अगस्त, 1936 में हुआ था। उनके पिता पॉल मोबियस शिप पर खाना बनाने का काम करते थे, जबकि उनकी मां प्यूर्तोरिको की रहने वालीं थी। मार्क का जन्म भले ही अमेरिका में हुआ हो, लेकिन उन्होंने अपनी कर्म भूमि सिंगापुर को बनाया और वहीं बस गए। आखिरी सांस भी उन्होंने सिंगापुर में ही ली। मार्क के दो भाई हांस और पॉल थे। मार्क का शुरुआती जीवन भले ही मुश्किलों भरा रहा लेकिन साल 1955 में बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए मिली स्कॉलरशिप ने उनकी जिंदगी बदल दी। तब उन्होंने पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए नाइटक्लब में पियानो तक बजाया और फाइन आर्ट में बैचलर डिग्री लेने के बाद कम्यूनिकेशंस में मास्टर किया। उन्हें जापानी कल्चर में रुचि थी, लिहाजा स्कॉलरशिप लेकर क्योटो आ गए और फिर हमेशा के लिए एशिया में ही बस गए। उन्होंने साल 1964 में मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से राजनीति विज्ञान और इकनॉमिक्स में पीएचडी करने के बाद इंटरनेशनल रिसर्च एसोसिएट्स में नौकरी करने लगे। उन्हें थाईलैंड और कोरिया में सर्वे करने और उपभोक्ताओं पर रिसर्च करने काम मिला। मार्क ने जल्द ही नौकरी छोड़ दी और हांगकांग में खुद की इंडस्ट्रियल रिसर्च फर्म खोल दी। उन्होंने हांगकांग शेयर बाजार पर एक शोध रिपोर्ट निकाली जो पूरी तरह एनालिसिस पर आधारित थी। उनकी रिसर्च देखकर अमेरिकी स्टॉक ब्रोकरेज विकर्स डा कोस्टा ने उन्हें हायर कर लिया। उन्होंने मार्क के साथ मिलकर ताईवानी फंड मैनेजमेंट कंपनी इंटरनेशनल इनवेस्टमेंट ट्रस्ट शुरू की।
वह अपनी कंपनी की ओर से टेम्लपटन को बहामास में निवेश के विकल्प बताने गए थे और साल 1986 में 10 करोड़ डॉलर की पूंजी जुटाकर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर अपना फंड लिस्ट करा लिया। यहीं से शुरू हो गई निवेश यात्रा और उन्होंने हांगकांग में 2 चीनी एनालिस्ट के साथ छोटा सा ऑफिस डाल दिया। उन्होंने 6 जगहों हांगकांग, फिलीपींस, सिंगापुर, मलेशिया, मैक्सिको और थाईलैंड से निवेश शुरू किया। मार्क को साल 1987 में अमेरिका की दिग्गज निवेश कंपनी टेम्पलटन ने हायर किया था, जहां उन्होंने अपने पहले म्यूचुअल फंड की शुरुआत की थी। मार्क साल 2016 तक इस कंपनी की देखरेख करते रहे। मॉर्निंगस्टार की रिपोर्ट से पता चलता है कि साल 1989 से मार्क के रिटायरमेंट तक उनके क्लोस-एंड फंड ने हर साल करीब 13.4 फीसदी का औसत रिटर्न दिया है। उन्होंने रिटायरमेंट के बाद साल 2018 में लंदन में मोबियस कैपिटल पार्टनर्स के नाम से कंपनी खोली, जिसका एक वेंचर दुबई में भी था। यह कंपनी दुनियाभर में निवेश के नए-नए विकल्प खोजने का काम करती थी। मार्क मोबियस ने ग्लोबल इनवेस्टमेंट की दुनिया में खूब नाम कमाया और साल 2026 में उनकी कुल नेटवर्थ करीब 5 करोड़ डॉलर यानी करीब 460 करोड़ रुपए के आसपास रही। उनकी देखरेख में कंपनी करीब 50 अरब डॉलर यानी 4.60 लाख करोड़ रुपए के एसेट का प्रबंधन करती थी। मोबियस जिस कंपनी की अगुवाई करते थे, उसका एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी एयूएम करीब 50 अरब डॉलर का था। उन्होंने निवेश को लेकर 4 किताबें लिखीं और शादी भी नहीं की। उनकी किताबों को दुनियाभर में खूब पसंद किया गया उनके अनुभव और जानकारियों को देखते हुए विश्व बैंक ने भी कुछ काम के लिए उनकी सेवाएं ली थी।
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