Trump झूठ बोलते-बोलते अब देशों के नाम भी गलत बोलने लगे, दावोस का भाषण जमकर हुआ वायरल
दावोस। खुद को दुनिया का शांति दूत बताने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप झूठ बोलते-बोलते अब देशों के नाम भी गलत बोलने लगे हैं। जिस तरह से वे पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के भाषण में होने वाले शब्दों के उच्चारणों का मजाक उड़ाते थे अब ऐसे ही शब्दों को लेकर सोशल मीडिया पर उनका मजाक उड़ाया जा रहा है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ट्रंप की स्पीच के क्लिप्स खूब वायरल हो रहे हैं। ऐसा नहीं है कि ट्रंप का यह भाषण पॉलिसी प्वाइंट के लिहाज से चर्चा में था, बल्कि उनकी जुबान की फिसलन उन्हें सुर्खियों में ले आई। खास बात ये है कि डोनाल्ड ट्रंप जिस वजह से पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन का मजाक उड़ाते रहे, उनके साथ वही दिक्कत देखी गई। उनके लंबे संबोधन के दौरान कई ऐसी बातें सामने आईं, जिन्हें लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई। अपने भाषण की शुरुआत में ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कूटनीतिक उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उनके नेतृत्व में कई वैश्विक टकराव खत्म हुए हैं और अमेरिका की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। यहां तक ठीक था लेकिन जैसे-जैसे बात आगे बढ़ी, लोगों का ध्यान ट्रंप की जुबान पर था। सबसे पहले ट्रंप ने एक देश के नाम का गलत उच्चारण कर दिया। उन्होंने अजरबैजान का नाम बोलते समय उसे ‘एबर-बैजान’ कह दिया। यह पल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बाद में जब इस पर सवाल किया गया, तो ट्रंप ने इस पर ज्यादा सफाई देने के बजाय अपनी कूटनीतिक उपलब्धियों पर ही जोर देना जारी रखा।
इसके बाद ट्रंप ने एक और बड़ी गड़बड़ी कर दी। उन्होंने अपने बयान में ग्रीनलैंड और आइसलैंड को लेकर उल्टा-पुल्टा बोल दिया। नाटो सहयोगियों और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें भरोसा नहीं है कि नाटो देश अमेरिका के साथ खड़े होंगे। इसी दौरान उन्होंने कहा कि वे हमारे लिए आइसलैंड पर भी साथ नहीं है। उन्होंने ये भी जोड़ दिया कि अमेरिका के शेयर बाजार में हालिया गिरावट आइसलैंड की वजह से हुई। ट्रंप यहां ग्रीनलैंड की बात करना चाहते थे, लेकिन बोल आइसलैंड रहे थे। डेनमार्क के इलाके ग्रीनलैंड में ट्रंप की रणनीतिक दिलचस्पी सभी जानते हैं, लेकिन उनके बयान में आइसलैंड का जिक्र आने से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। क्या बाइडन वाली बीमारी से जूझ रहे ट्रंप ट्रंप के इन बयानों के वीडियो क्लिप्स जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आए, वैसे ही प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में लिया और मजाक बनाया, जबकि कुछ ने इतने अहम अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसी गलतियों को लेकर चिंता जताई। कई लोगों का कहना था कि ऐसे मंचों पर स्पष्टता और सटीकता बेहद जरूरी होती है। हालांकि इन वायरल पलों के बावजूद ट्रंप के भाषण में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक गठबंधनों जैसे बड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। वो बात अलग है कि ट्रंप के जुबान फिसलना ज्यादा चर्चित हुई।
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