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  • Sunday, 18 January 2026
ट्रंप के ईरान अटैक प्लान से क्यों डरा हुआ है Pakistan, क्या कुछ टूट जाने का खतरा है सता रहा?

ट्रंप के ईरान अटैक प्लान से क्यों डरा हुआ है Pakistan, क्या कुछ टूट जाने का खतरा है सता रहा?

इस्लामाबाद। ईरान पर अमेरिका के संभावित सैन्य हमले की आशंका का सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान की चिंता में नजर आ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के अटैक प्लान की चर्चाओं के बीच पाकिस्तान को डर है कि अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन या बड़े पैमाने पर अस्थिरता हुई तो उसके अशांत बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोह की आग और तेज हो सकती है। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम को पाकिस्तान अपने लिए एक गंभीर रणनीतिक खतरे के तौर पर देख रहा है। यहां बताते चलें कि पाकिस्तान और ईरान के बीच करीब 900 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो सीधे पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील प्रांत बलूचिस्तान से लगती है। यह वही इलाका है जहां दशकों से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है। ईरान का सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत भी इसी सीमा पर स्थित है, जहां रहने वाले बलूच समुदाय के पाकिस्तान के बलूचों से जातीय, भाषाई और जनजातीय संबंध हैं। ऐसे में ईरान में किसी भी तरह की उथल-पुथल का असर सीधे पाकिस्तान पर पड़ सकता है। इस मामले में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत आसिफ दुर्रानी का कहना है कि ईरान में चाहे आंतरिक बदलाव हों या बाहरी हस्तक्षेप, उसका सीधा प्रभाव पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर पड़ेगा। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर ईरान में हालात बिगड़े तो बलूच विद्रोही गुटों को नए ठिकाने और समर्थन मिल सकता है, जिससे सीमा पार आतंकवाद, हथियारों की तस्करी और हिंसक घटनाएं बढ़ सकती हैं।

बलूचिस्तान में पहले से ही कई विद्रोही संगठन सक्रिय हैं, जो पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के साथ-साथ चीनी परियोजनाओं को भी निशाना बनाते रहे हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) इस प्रांत से होकर गुजरता है और इसमें किसी भी तरह की अस्थिरता पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। अलगाववादी गुट खुले तौर पर बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने की मांग कर चुके हैं, जिससे ‘टूटने के डर’ की आशंका और गहरी हो जाती है। पाकिस्तान को एक और बड़े शरणार्थी संकट का भी डर सता रहा है। 2021 में अफगानिस्तान से लाखों शरणार्थियों के आने से पाकिस्तान पहले ही भारी आर्थिक दबाव में है। अगर ईरान में युद्ध या सत्ता परिवर्तन होता है तो बड़ी संख्या में ईरानी शरणार्थियों के पाकिस्तान आने की आशंका है, जिसे आईएमएफ के कर्ज पर चल रही अर्थव्यवस्था झेल नहीं पाएगी। पूर्व विदेश सचिव जोहर सलीम ने चेतावनी दी है कि ईरान में किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है। पाकिस्तानी मीडिया में भी यह माना जा रहा है कि ईरान में सत्ता का पतन पाकिस्तान के लिए सिर्फ एक कूटनीतिक नहीं, बल्कि अस्तित्व से जुड़ा संकट बन सकता है।

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