Wilfred Rhodes: क्रिकेट के वो बेजोड़ रिकॉर्ड, जिन्हें तोड़ना आज भी है नामुमकिन
लंदन। विश्व क्रिकेट के इतिहास में अगर किसी खिलाड़ी का करियर सबसे लंबा और बेजोड़ रहा है, तो वह गुजरे जमाने के इंग्लैंड के महान क्रिकेटर विल्फ्रेड रोड्स हैं। तीन दशकों तक चले अपने करिश्माई करियर से रोड्स ने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया जिसे छूना तो दूर, उसके करीब भी कोई खिलाड़ी नहीं पहुंच पाया है। उनके रिकॉर्ड इतने विशाल और अविश्वसनीय हैं कि आधुनिक युग के महानतम बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर भी उनसे काफी पीछे नजर आते हैं, जो अपने आप में रोड्स की असाधारण प्रतिभा और लंबी आयु का प्रमाण है। विल्फ्रेड रोड्स का अंतरराष्ट्रीय करियर 1899 में शुरू हुआ और 1930 तक, यानी पूरे 30 साल और 315 दिनों तक चला। यह एक ऐसा आंकड़ा है जो क्रिकेट जगत में आज भी बेमिसाल है। उन्होंने 52 साल की उम्र में अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला, जो उनकी शारीरिक फिटनेस और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है। यह उम्र कई क्रिकेटरों के संन्यास लेने के बाद कोच या कमेंटेटर बनने की होती है, लेकिन रोड्स तब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय थे।
उनके रिकॉर्ड केवल अंतरराष्ट्रीय करियर की लंबाई तक ही सीमित नहीं हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में विल्फ्रेड रोड्स द्वारा खेले गए कुल 1,110 मैच एक ऐसा आंकड़ा है जिसे तोड़ना आज के दौर में किसी भी क्रिकेटर के लिए संभव नहीं है। आज जहां खिलाड़ियों का वर्कलोड मैनेज किया जाता है और कुछ सौ फर्स्ट-क्लास मैच खेलना ही बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, वहां रोड्स के आंकड़े कल्पना से भी परे हैं। एक ऑलराउंडर के रूप में उन्हें खेल के हर पहलू में महारत हासिल थी। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक घातक गेंदबाज के रूप में की, फिर अपनी बल्लेबाजी में सुधार करके एक कुशल मध्यक्रम बल्लेबाज से होते हुए एक सफल सलामी बल्लेबाज के तौर पर अपनी पहचान बनाई। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 4,000 से अधिक विकेट लेने और 39,000 से अधिक रन बनाने वाले वह एकमात्र खिलाड़ी हैं, जो उनकी अद्भुत बहुमुखी प्रतिभा का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
उनकी लंबी उम्र और निरंतर प्रदर्शन का सबसे शानदार उदाहरण 1926 की एशेज सीरीज में देखने को मिला। 48 साल की उम्र में उन्हें इंग्लैंड टीम में वापस बुलाया गया, जबकि उन्होंने अपना पिछला टेस्ट छह साल पहले खेला था। रोड्स ने अपने चयन को पूरी तरह से सही साबित करते हुए अपनी घातक स्पिन गेंदबाजी से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी को तहस-नहस कर दिया। उन्होंने उस महत्वपूर्ण मैच में कुल 6 विकेट लिए, जिसकी बदौलत इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर प्रतिष्ठित एशेज ट्रॉफी जीती। यह घटना दर्शाती है कि उम्र के जिस पड़ाव पर अधिकतर खिलाड़ी खेल से दूर हो जाते हैं, रोड्स तब भी अपनी टीम के लिए मैच विजेता प्रदर्शन कर रहे थे।
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