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महिला ने सिरदर्द, vomiting को लिया हल्के में, जान पर बन आई

महिला ने सिरदर्द, vomiting को लिया हल्के में, जान पर बन आई

  • डॉक्‍टरों बता दिया- महिला को स्‍टेज3 का मस्तिष्‍क ट्यूमर


न्‍यूयॉर्क। सिडनी की रहने वाली एक महिला को यूरोप की यात्रा के दौरान अचानक एक दिन मतली, सिर में दर्द और उल्‍टी महसूस हुई। उसे लगा कि सामान्‍य बात होगी। लेकिन हालत खराब होती गई। फिर एक ऐसी बात पता चली कि पैरों तले जमीन खिसक गई। अब उसकी जान पर बन आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 21 साल की जेनाया शॉ दोस्‍तों के साथ यूरोप घूमने के लिए निकली थीं। काफी खुश थीं जब तक उन्‍हें पता नहीं चला कि उन्‍हें क्‍या बीमारी हो गई है। एक दिन घूमते समय अचानक उन्‍हें मतली शुरू हुई। फिर उल्‍टी होने लगी। लक्षण धीरे-धीरे खतरनाक हो गए। सिरदर्द ऐसे होने लगा कि जैसे सिर फट जाएगा। संतुलन बिगड़ने लगा। हाथ पैरों ने काम करना बंद कर दिया और वह गिर गईं। जब दोस्‍तों ने उन्‍हें उठाया तो दाहिनी आंख की रोशनी जा चुकी थी। उन्‍हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। दोस्‍तों ने ट्रिप बीच में खत्‍म कर दी और जेनाया को लेकर सिडनी लौट आए। वहां डॉक्‍टरों ने देखने के बाद जो बात बताई, उससे पैरों तले जमीन खिसक गई।


डॉक्‍टरों ने कहा कि जेनाया को स्‍टेज3 का मस्तिष्‍क ट्यूमर है। अगर समय पर सर्जरी कर उसे बाहर नहीं निकाला गया तो जानलेवा भी साबित हो सकता है। जेनाया ने कहा, यह जानने के बाद तो लगा कि 21 साल की उम्र में मेरी दुनिया उजड़ गई। लेकिन मैं खुश हूं कि मेरे दोस्‍त मेरे साथ हैं और वो मुझे मरने नहीं देंगे। इसने मुझे बहुत सारे सबक सिखाए हैं, जिनमें से मुख्य है कि आपका स्वास्थ्य वास्तव में सबसे महत्वपूर्ण है। अगर आपका हेल्‍थ ठीक नहीं तो आपके पास कुछ भी नहीं है। पिछले तीन महीने में जेनाया की तीन मस्तिष्क सर्जरी की गई है ताकि ट्यूमर को रिमूव किया जा सके। इस पर काफी खर्च भी आया और परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर हो गया है। अभी पता नहीं कितना और पैसा खर्च होना है। जेनाया के इलाज के लिए दोस्‍त आगे आए हैं। एक चैरिटी गोपफंडमे के जरिए धन जुटा रहे हैं। दोस्‍तों ने 35000 डॉलर जुटाने का लक्ष्‍य रखा गया है और अब तक 28000 डॉलर से अधिक की राशि जुटा ली गई है।
धन जुटा रही चेल्‍सी ऐश ने लिखा, पहले से ही तीन सर्जरी झेलने के बाद जेनाया का परिवार पूरी तरह टूट चुका है। हम उसका दुख और बोझ कुछ कम करना चाहते हैं। बता दें कि सिरदर्द, उल्‍टी, बेचैनी जैसी छोटी-छोटी दिक्‍कतों को हम अक्‍सर नजरअंदाज कर देते हैं। बेड पर जाकर लेट जाते हैं ताकि कुछ समय में ठीक हो जाए। कई बार ज्‍यादा दिक्‍कत हुई तो घर में रखी दवा खा लेते हैं। डॉक्‍टर के पास हम तब तक नहीं जाते, जब तक हालत ज्‍यादा खराब न हो जाए।

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