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  • Monday, 14 September 2026
BRICS के बाद चीन ने ताइवान को लेकर अमेरिका को दी चेतावनी

BRICS के बाद चीन ने ताइवान को लेकर अमेरिका को दी चेतावनी

बीजिंग। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से भारत से रवाना होते ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के सामने ताइवान को लेकर एक नई और गंभीर चुनौती पेश कर दी है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, चीन ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को स्पष्ट संकेत दिया है कि ताइवान उसके लिए रेड लाइन है और अगर अमेरिका ताइवान को हथियारों की नई खेप देने की मंजूरी देता है, तो 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में प्रस्तावित ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात रद्द हो सकती है। भारत से निकलते ही जिनपिंग ने वॉशिंगटन की ओर ऐसा दांव चला है, जिसने ट्रंप के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: ताइवान को हथियार दें या जिनपिंग के साथ महत्वपूर्ण बैठक बचाएं? शी जिनपिंग रविवार को नई दिल्ली से रवाना हुए। उन्होंने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की, जो सात साल बाद उनकी भारत यात्रा थी। लेकिन भारत से निकलने के तुरंत बाद ताइवान को लेकर सामने आई इस खबर ने चीन-अमेरिका रिश्तों की दिशा पर सभी का ध्यान खींच लिया है। जानकारी के मुताबिक, चीन ने ट्रंप प्रशासन को यह संकेत दिया है कि ताइवान के लिए प्रस्तावित अमेरिकी हथियार सौदा आगे बढ़ने पर जिनपिंग 24 सितंबर की बैठक रद्द कर सकते हैं।

हालांकि, चीन या अमेरिका की तरफ से इस कथित धमकी और हथियार सौदे को लेकर अभी सार्वजनिक तौर पर ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। ट्रंप के सामने अब दोहरी चुनौती है। ट्रंप और जिनपिंग की 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में मुलाकात प्रस्तावित है, जो एक साल के भीतर दोनों नेताओं की तीसरी बैठक होगी। लेकिन ताइवान का सवाल इस मुलाकात के रास्ते में सबसे बड़ी अड़चन बनता दिख रहा है। चीन ताइवान को अपना अविभाज्य हिस्सा मानता है और उसे अपने साथ मिलाने की बात करता रहा है, यहां तक कि जरूरत पड़ने पर सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। वहीं अमेरिका ताइवान का अहम सैन्य और राजनीतिक साझेदार है। ऐसे में अगर अमेरिका ताइवान को हथियार देता है, तो चीन इसे सीधे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा मान सकता है। ताइवान को लेकर जिनपिंग की यह सख्त लाइन नई नहीं है। मई में बीजिंग में ट्रंप के साथ हुई बैठक के दौरान भी जिनपिंग ने ताइवान को चीन-अमेरिका रिश्तों का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया था। उन्होंने तब भी चेतावनी दी थी कि अगर इस मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया तो दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप प्रशासन इस नई चुनौती का सामना कैसे करता है और क्या यह प्रस्तावित मुलाकात रद्द होगी या नहीं।

 

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