आखिर China में ही बार-बार क्या आ रहे है समुद्री तूफान
बीजिंग। डॉल्फिन टाइफून ने चीन के कई तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई है। टाइफून के कारण मूसलाधार बारिश, तेज हवाओं और बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। इतना ही नहीं, हजारों उड़ानों और परिवहन सेवाओं पर असर पड़ा है। दो महीने में चीन में मेसाक, बावी, नोल और अब डॉल्फिन सहित चार बड़े टाइफून दस्तक दे चुके हैं। लगातार आ रहे चक्रवातों ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि आखिर चीन ही बार-बार इन समुद्री तूफानों का सबसे बड़ा निशाना क्यों बनता है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन का पूर्वी और दक्षिणी तटीय क्षेत्र सीधे पश्चिमी प्रशांत महासागर और दक्षिण चीन सागर से जुड़ा हुआ है। यही क्षेत्र दुनिया में सबसे अधिक टाइफून उत्पन्न करने वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। अधिकांश टाइफून फिलीपींस के पूर्वी समुद्री इलाके में विकसित होते हैं। वैश्विक मौसम एजेंसियों के अनुसार, इस क्षेत्र में हर वर्ष औसतन 25 से 30 टाइफून बनते हैं। इसके बाद पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र की सबट्रॉपिकल हाई प्रेशर बेल्ट और प्रचलित हवाएं इन्हें पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर धकेलती हैं। इस प्राकृतिक मार्ग में सबसे पहले फिलीपींस, फिर ताइवान और उसके बाद चीन का पूर्वी तट आता है, जिससे चीन बार-बार इन तूफानों की चपेट में आ जाता है।
चीन की लंबी समुद्री तटरेखा और तटीय इलाकों में बसे प्रमुख आर्थिक केंद्र भी जोखिम को बढ़ाते हैं। ग्वांगडोंग, फुजियान, झेजियांग, हैनान और शंघाई जैसे महत्वपूर्ण शहर समुद्र के किनारे स्थित हैं। ऐसे में जब कोई शक्तिशाली टाइफून तट से टकराता है तो भारी वर्षा, समुद्री लहरों का उफान, बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं व्यापक नुकसान पहुंचाती हैं। कृषि, उद्योग, परिवहन, बिजली और संचार सेवाएं भी गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण समुद्र का पानी लगातार गर्म हो रहा है, जिससे टाइफून को अधिक ऊर्जा मिलती है। हालांकि अभी यह स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं हुआ है कि जलवायु परिवर्तन टाइफूनों की संख्या बढ़ा रहा है, लेकिन इस बात पर व्यापक सहमति है कि गर्म समुद्र इनके अधिक शक्तिशाली बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के बढ़ते तापमान और तटीय क्षेत्रों में तेजी से हो रहे शहरीकरण को देखते हुए भविष्य में चीन को और भी अधिक तीव्र तथा विनाशकारी टाइफूनों का सामना करना पड़ सकता है।
मालूम हो कि टाइफून मूल रूप से समुद्र में बनने वाला उष्णकटिबंधीय चक्रवात होता है। इसके केंद्र में वायुदाब बहुत कम होता है, जबकि इसके चारों ओर अत्यधिक तेज गति से हवाएं घूमती हैं। ऐसे तूफानों का निर्माण तब होता है जब समुद्र की सतह का तापमान लगभग 26.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है। अलग-अलग महासागरों में बनने वाले इन चक्रवातों के नाम अलग होते हैं। पश्चिमी प्रशांत महासागर में बनने वाले चक्रवातों को टाइफून, अटलांटिक और पूर्वी प्रशांत महासागर में बनने वालों को हरिकेन तथा हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवातों को साइक्लोन कहा जाता है।
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