मुस्लिम देशों में फूट डालकर संसाधनों पर कब्जे कर रहा America
- ईरान का अमेरिका-इजराइल पर लगाए गंभीर आरोप
तेहरान। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजराइल पर मुस्लिम देशों में फूट डालने और उनके संसाधनों पर कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को अब अमेरिका के साथ बातचीत पर कोई भरोसा नहीं है, क्योंकि पहले भी बातचीत के बाद ईरान पर हमले और प्रतिबंध लगाए गए थे। पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान यह नहीं समझ पा रहा कि अमेरिका के साथ किस आधार पर कोई समझौता संभव है। उन्होंने बताया कि वह और विदेश मंत्री अब्बास अरागची, संयुक्त राष्ट्र की बैठक में युद्ध समाप्त करने के लिए एक प्रस्ताव लेकर अमेरिका गए थे। ईरान के प्रस्ताव में 4-5 दिनों में प्रारंभिक समझौते की प्रक्रिया पूरी करने, छठे दिन होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और सातवें दिन अमेरिका के साथ अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू करने की बात कही गई थी। इसके बदले ईरान चाहता था कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाए, तेल बिक्री पर प्रतिबंधों में राहत दे और लगभग 12 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति जारी करे, साथ ही पूरे क्षेत्र में युद्धविराम हो। पेजेश्कियान ने ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की, यह कहते हुए कि जिन देशों ने ईरान को दवाइयों और कच्चे माल तक पहुंच से वंचित किया, वही देश गाजा में भोजन और पानी की किल्लत के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव डालने का प्रयास सफल नहीं होगा। उन्होंने मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए इस क्षेत्र के देशों को मिलकर काम करने की वकालत की और कहा कि क्षेत्र को किसी बाहरी पुलिसवाले की जरूरत नहीं है।
उन्होंने अमेरिका को इस युद्ध का हमलावर बताया और कहा कि ईरान ने लंबे समय से किसी दूसरे देश पर हमला नहीं किया है। पेजेश्कियान ने दावा किया कि अमेरिका और इजराइल ने उम्मीद की थी कि ईरान सरकार कुछ ही दिनों में कमजोर हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनके अनुसार, ईरान अमेरिकी और इजराइली हमलों का सामना कर चुका है और आगे भी पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल ने क्षेत्र के कुछ देशों के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए किया। जब ईरान अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाता है, तो उसका कारण यह है कि इन्हीं ठिकानों से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई होती है। पेजेश्कियान ने कहा कि सऊदी अरब मुस्लिम देशों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यमन के हूती समूह और सऊदी अरब समर्थित यमनी बलों से बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने की अपील की, और यह भी स्पष्ट किया कि हूतियों की कार्रवाई ईरान से जुड़ी हुई नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
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