Afghanistan के क्रिकेटरों के बचाव में उतरे आकाश
नई दिल्ली। पूर्व क्रिकेटर बल्लेबाज आकाश चोपड़ा तीन क्रिकेटरों नवीन-उल हक, मुजीब उर रहमान और फजलहक फारूकी को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं देने के अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) के फैसले से सहमत नहीं हैं। आकाश ने इसे गलत बताया है। ये तीनों पर आरोप है कि इन्होंने राष्ट्रीय टीम की ओर से खेलने की जगह पर टी20 लीग को प्राथमिकता दी। वहीं एसीबी ने कहा कि अनुशासनात्मक कदम के तौर पर नवीन, मुजीब और फारूकी को वार्षिक केंद्रीय अनुबंधों से मुक्त करने के अनुरोध को देखते हुए अगले दो वर्षों तक के लिए एनओसी नहीं दी जाएगी। एसीबी ने कहा कि तीनों ने अफगानिस्तान के लिए खेलने की जगह पर अपने व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता दी जिसे एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी माना जाता है। इसी कारण इन खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाना पड़ा है। वहीं चोपड़ा ने साथ ही कहा, आप उन्हें अनुबंध नहीं दे रहे हैं। आप उन्हें अवसर भी नहीं दे रहे हैं।
ये खिलाड़ी इसलिए बेहतर नहीं बन रहे हैं क्योंकि एसीबी अच्छा काम कर रहा है, बल्कि इसलिए क्योंकि ये फ्रेंचाइजी क्रिकेट खेल रहे हैं। वे अलग-अलग देशों में जाकर क्रिकेट खेलते हैं। मुझे लगता है कि उन्हें दो साल तक एनओसी न देना नुकसानदेह रहेगा। इन खिलाड़ियों ने पहले ही कहा था कि वे अफगानिस्तान के बाहर अपना जीवन यापन करते हैं। उनसे कहा जा रहा है कि देश के हितों को प्राथमिकता दें। लेकिन अगर उनके हितों की रक्षा नहीं की जाती है, अगर उन्हें आजीविका कमाने की अनुमति नहीं दी जाती है, तो उन्हें क्या करना चाहिए? एसीबी के इस फैसले से ये क्रिकेटर आईपीएल 2024 में भी नहीं खेल पायेंगे। लखनऊ सुपर जाइंट्स और सनराइजर्स हैदराबाद ने क्रमशः नवीन और फारूकी को बरकरार रखा जबकि कोलकाता नाइट राइडर्स ने 19 दिसंबर को दुबई में आईपीएल प्लेयर नीलामी में मुजीब को बोर्ड में शामिल किया। चोपड़ा ने अंत में कहा, कहा जा रहा है कि इस फैसले से तीन आईपीएल फ्रेंचाइजियों लखनऊ, हैदराबाद और कोलकाता की मुश्किलें भी बढ़ जाएंगी क्योंकि उन्हें अंतिम समय पर वैकल्पिक खिलाड़ी शामिल करने पड़ेंगे।
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