अमेरिका ने वार्ता के लिए रोकी जंग, बातचीत के गिड़गिड़ा रहा ईरान: Rubio
- ईरान ने अमेरिका दावे किए खारिज, कहा-ऐसा करना हमारे डीएनए में ही नहीं
तेहरान। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर लगातार दो सप्ताह से जारी हमलों पर ब्रेक लगा दिया है। अमेरिका के बाद ईरान ने भी ऐलान किया है कि जब तक अमेरिकी संघर्ष विराम कायम रहेगा, वो भी हमले नहीं करेगा। दोनों देशों के इस फैसले के बाद ग्लोबल ऑयल मार्केट में बड़ा बदलाव आया। मिडिल-ईस्ट में हमलों पर ब्रेक लगने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई, जिससे ग्लोबल सप्लाई बहाल होने की उम्मीद जगी। पिछले हफ्ते मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड सोमवार को 8 फीसदी से ज्यादा टूटकर 89 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया कि ईरान समझौते के लिए भीख मांग रहा है और हमले वार्ता का रास्ता खोलने के लिए रोके गए हैं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बघाई ने तेहरान में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका से शांति वार्ता शुरू करने की कोई रिक्वेस्ट नहीं की है। बघाई ने कहा कि ईरान की ओर से अमेरिका से बातचीत की भीख मांगने की खबरें मनगढ़ंत हैं। ऐसा करना हमारे डीएनए में ही नहीं है।
उन्होंने ये भी माना कि मध्यस्थों के जरिए बातचीत चल रही है और ईरान ने कूटनीति का रास्ता बंद नहीं किया है। ईरान ने ये भी बताया कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण कायम है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक सोमवार सुबह स्ट्रेट पार करने की कोशिश कर रहे छह उल्लंघनकर्ता जहाजों को वापस मोड़ दिया, जिनमें से एक जहाज दुर्घटनाग्रस्त भी हो गया। ईरान का कहना है कि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सिर्फ उसके तय किए गए मार्ग से ही होगी, जो उसकी तटीय सीमा के पास है! दूसरी तरफ, अमेरिका चाहता है कि जहाज ओमान के तट के करीब से गुजरें।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के मुताबिक 13 रातों तक चले भीषण हमलों के बाद ट्रंप को उनके सैन्य सलाहकारों ने हमले रोकने की सलाह दी थी। अधिकारियों का मानना था कि होर्मुज पर ईरान की पकड़ ढीली करने के मकसद से शुरू की गई ये जंग अपनी सीमा तक पहुंच चुकी थी। एक बातचीत में एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि सेना के पास निशाना बनाने के लिए नए टारगेट खत्म हो रहे थे। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने वायु रक्षा गोला-बारूद की कमी पर भी चिंता जताई थी।
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