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BCCI सचिव सैकिया ने ड्रीम11 के टाइटल स्पॉन्सरशिप से हटने की पुष्टि की

BCCI सचिव सैकिया ने ड्रीम11 के टाइटल स्पॉन्सरशिप से हटने की पुष्टि की

नये स्पॉन्सर के लिए जल्द ही टेंडर जारी होगा

मुम्बई। गेमिंग कंपनी ड्रीम11 के भारतीय क्रिकेट टीम की टाइटल स्पॉन्सरशिप से हटने के बाद अब भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के लिए सबसे बड़ी चुनौती नये स्पॉन्सर की तलाश करना है। सोमवार को बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने ड्रीम11 के टाइटल स्पॉन्सरशिप से हटने की आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने कहा, ड्रीम11 के प्रतिनिधियों ने बीसीसीआई सीईओ हेमंग अमीन को जानकारी दी है कि वे इस करार से हट रहे हैं। ऐेसे में अब वे एशिया कप के लिए टीम के प्रायोजक नहीं रहेंगे। बीसीसीआई नये स्पॉन्सर के लिए जल्द ही एक नया टेंडर जारी करेगा। सैकिया ने कहा, नए कानून के तहत, बीसीसीआई के लिए ड्रीम11 या किसी अन्य समान गेमिंग कंपनी के साथ करार जारी रखना संभव नहीं होगा। मुझे नहीं लगता कि बीसीसीआई अब ड्रीम11 के साथ करार जारी रख पाएगा। हम इस समय विकल्प पर विचार कर रहे हैं। वहीं अगले माह 9 सितंबर से यूएई में टी20 एशिया कप से पहले नये स्पॉन्सर के लिए टेंडर जारी करने को लेकर सैकिया ने कहा, हमने अभी तक इस मामले में कुछ भी तय नहीं किया है पर हमें अब एक नया विकल्प तलाशना होगा। ड्रीम11 के जाने से स्पॉन्सरशिप स्लॉट खाली हो जाएगा। इसलिए, हमें एक विकल्प की तलाश है।

हमें इसके लिए क्या करना होगा और कैसे करना होगा, इस पर हम अभी विचार-विमर्श कर रहे हैं। गौरतब है कि जुलाई 2023 में ड्रीम11 ने एडटेक कंपनी बायजू की जगह भारतीय क्रिकेट टीम के लीड स्पॉन्सर के रूप में तीन साल का करार किया था। यह करार 358 करोड़ रुपये में हुआ था। ऑन लाइन गेमिंग एप पर प्रतिबंध के बाद ही ड्रीम11 को टाइटल स्पॉन्सरशिप छोड़नी पड़ी है। टाइटल स्पॉन्सरशिप से बीसीसीआई को करोड़ों रुपये सालाना आय होती है, ऐसे में उसका प्रयास जल्द से जल्द नये स्पॉन्सर को खोजना रहेगा। ऑनलाइन गेमिंग बिल पास होने के बाद ये लगभग तय था कि ड्रीम11 और बीसीसीआई का करार समाप्त हो जाएगा। ड्रीम11 ने बीसीसीआई को सूचित कर दिया है कि वह अब टीम को स्पॉन्सर नहीं कर सकेगी। कोई टाइटल स्पॉन्सर हटता है तो उसके जुर्माना देना पड़ता पर इस मामले में ऐसा नहीं होगा, क्योंकि अनुबंध में एक प्रावधान है जिसके अनुसार यदि प्रायोजक का मुख्य व्यवसाय सरकार द्वारा लाए गए किसी कानून से प्रभावित होता है, तो उन्हें करार से बहार होने पर बोर्ड को जुर्माना नहीं देना होगा।

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