Balochistan प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध फिर भी गरीबी और तस्करी से जूझ रहा
- भौगोलिक परिस्थितियां यहां अवैध कारोबार के लिए पैदा करती हैं अनुकूल परिस्थितियां
क्वेटा। पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद लंबे समय से गरीबी, बेरोजगारी, कमजोर बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा संकट से जूझ रहा है। रणनीतिक रूप से यह क्षेत्र अफगानिस्तान और ईरान की सीमाओं से जुड़ा होने के कारण अवैध तस्करी के नेटवर्क के लिए भी संवेदनशील माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक कमजोर आर्थिक अवसर और सीमावर्ती इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियां यहां अवैध कारोबार के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा करती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान के आसपास का क्षेत्र लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी मार्गों से जुड़ा रहा है। इसी व्यापक क्षेत्र को अक्सर ‘गोल्डन क्रेसेंट’ कहा जाता है। अफीम और हेरोइन के साथ अब सिंथेटिक ड्रग्स, विशेष रूप से मेथामफेटामिन की तस्करी भी क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में अफीम उत्पादन पर प्रतिबंध के बाद ओपिएट की उपलब्धता और जब्ती में गिरावट आई है, लेकिन मेथामफेटामिन की तस्करी में कमी नहीं दीखी।
रिपोर्ट के मुताबिक बलूचिस्तान की लंबी और दुर्गम सीमाएं तस्करी रोकने में बड़ी चुनौती पेश करती हैं। नशीले पदार्थों के अलावा ईंधन, हथियार और अन्य प्रतिबंधित सामान की अवैध आवाजाही भी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव डालती रही है। सीमावर्ती इलाकों में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण स्थानीय स्तर पर अवैध गतिविधियों से जुड़ने का जोखिम भी बढ़ता है। अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई का दावा किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र की निगरानी रिपोर्ट बताती है कि प्रतिबंध के बावजूद बड़े पैमाने पर तस्करी समाप्त नहीं हुई है। छोटे स्तर के तस्करों पर कार्रवाई का असर दिखाई देता है, लेकिन बड़े तस्करी नेटवर्क और सिंथेटिक ड्रग्स की आवाजाही चिंता का विषय बनी हुई है। बलूचिस्तान की समस्या केवल नशे की तस्करी तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान का यह प्रांत खनिज संसाधनों के कारण भी रणनीतिक महत्व रखता है, लेकिन संसाधनों के इस्तेमाल, स्थानीय हिस्सेदारी और विकास को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। ऐसे में बलूचिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती गरीबी और बेरोजगारी से निपटने के साथ सीमापार अपराध और मादक पदार्थों के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाने की है।
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