Bangladesh में आम चुनाव की हलचल के बीच हसीना की पार्टी पर बैन लगाने की मांग उठी
ढाका। बांग्लादेश में चुनावी राजनीति की दिशा तेजी से बदल रही है। भले ही चुनाव की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन विभिन्न राजनीतिक दलों और नए उभरते संगठनों की सक्रियता से यह संकेत मिल रहे हैं कि आगामी चुनाव के लिए गतिविधियाँ तेज हो चुकी हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस का अनुमान है कि आम चुनाव दिसंबर 2025 या जनवरी 2026 में हो सकते हैं। शेख हसीना की पार्टी, अवामी लीग, और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी करने में जुट चुकी हैं। इन दोनों दलों के अलावा, नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) भी चुनावी परिदृश्य में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए सक्रिय हो गई है। हालांकि, इस बार बांग्लादेश की चुनावी राजनीति में एक नया मोड़ आया है। एनसीपी, जो छात्र आंदोलनों से उभरकर सामने आई है, ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जब तक अवामी लीग पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाता और चुनावी प्रणाली में सुधार नहीं होते, तब तक वे इस चुनाव को वैध नहीं मानेंगे। एनसीपी के दक्षिण क्षेत्र प्रमुख हसनत अब्दुल्ला का कहना है, कि हम अवामी लीग पर प्रतिबंध और चुनावी सुधार दोनों पर समानांतर रूप से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही, यह पार्टी ग्रामीण इलाकों और कॉलेज परिसरों में तेजी से अपनी पकड़ बना रही है और आगामी चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाने का दावा करती दिख रही है। इसके अलावा, धार्मिक संगठनों से संभावित गठजोड़ की खबरें भी उभर कर सामने आ रही हैं, जिससे एनसीपी के भविष्य के राजनीतिक प्रभाव पर चर्चाएं आम हो गई हैं।
खालिदा जिया की वापसी से बीएनपी को मिली ऊर्जा पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की वापसी भी बीएनपी के लिए एक नया उत्साह लेकर आई है। खालिदा जिया लंदन से ढाका लौट रही हैं, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश आया है। बीएनपी ने यह घोषणा की है कि वह सभी 300 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। हालांकि, पार्टी के नेता तारिक रहमान की वापसी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिससे बीएनपी के अंदर थोड़ी असमंजस की स्थिति देखी जा रही है। विपक्षी दलों का निष्पक्ष चुनाव पर संदेह बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और वरिष्ठ नेता रुहुल कबीर रिजवी ने अवामी लीग सरकार के तहत निष्पक्ष चुनाव के आयोजन पर सवाल उठाए हैं। पार्टी की छात्र शाखा भी यूनिवर्सिटी परिसरों में सक्रिय हो रही है और चुनावी गतिविधियों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। बांग्लादेश की चुनावी राजनीति इस बार केवल पारंपरिक अवामी लीग और बीएनपी तक सीमित नहीं रही है। एनसीपी, जो छात्र आंदोलनों से उभरी है, ने जनभावनाओं और मुद्दों को नया मंच दिया है। इसके अलावा, खालिदा जिया की वापसी, चुनावी सुधार की मांग और अवामी लीग पर प्रतिबंध की मांग जैसे मुद्दे चुनावी परिदृश्य को और गर्माएंगे।
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