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सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा 'Dracula parrot'

सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा 'Dracula parrot'

लंदन। सोशल मीडिया पर आजकल एक दुर्लभ पक्षी की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसे ‘ड्रैकुला तोता’ कहा जाता है। इस तोते का चेहरा और रंग-रुप पहली नजर में किसी रहस्यमयी या डरावनी फिल्म के पात्र जैसा लगता है, लेकिन इसकी वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। अपने अनोखे स्वरूप के कारण चर्चा में रहने वाला यह पक्षी प्रकृति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वैज्ञानिक जगत में इस पक्षी को ‘पेस्केट्स पैरट’ के नाम से जाना जाता है। इसके शरीर पर मुख्य रूप से काले और धूसर रंग के पंख होते हैं, जबकि पेट और शरीर के कुछ हिस्सों में चमकीला लाल रंग दिखाई देता है। इसकी सबसे खास पहचान इसका सिर है, जिस पर लगभग पंख नहीं होते। यही वजह है कि इसे देखने पर कई लोगों को गिद्ध की याद आ जाती है। इसके काले-लाल रंग और रहस्यमयी चेहरे ने ही इसे ‘ड्रैकुला तोता’ जैसा लोकप्रिय नाम दिलाया है। हालांकि नाम सुनकर ऐसा लगता है कि यह कोई खतरनाक या रक्तपान करने वाला पक्षी होगा, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। यह पूरी तरह से फलाहारी पक्षी है और किसी भी प्रकार का शिकार नहीं करता।


 विशेषज्ञों के अनुसार इसके सिर पर पंख न होना प्रकृति की एक विशेष अनुकूलन प्रक्रिया का परिणाम है। यह पक्षी मुख्य रूप से अंजीर और अन्य रसीले फलों का सेवन करता है। फलों का रस खाते समय चिपचिपा पदार्थ पंखों में न फंसे और सिर साफ बना रहे, इसलिए इसके सिर पर पंख विकसित नहीं हुए। यही कारण है कि इसका चेहरा अन्य तोतों से बिल्कुल अलग दिखाई देता है। ड्रैकुला तोता दुनिया के सबसे बड़े तोतों में गिना जाता है। इसकी लंबाई लगभग 50 सेंटीमीटर तक हो सकती है। हालांकि आकार में बड़ा होने के बावजूद इसे देख पाना आसान नहीं है। यह मुख्य रूप से पापुआ न्यू गिनी के घने और ऊंचे वर्षावनों में निवास करता है। स्वभाव से यह बेहद शर्मीला माना जाता है और आमतौर पर इंसानों से दूरी बनाए रखता है। इसी वजह से इसके बारे में जानकारी सीमित है और इसे जंगलों में देख पाना भी दुर्लभ माना जाता है। यह अनोखा पक्षी आज कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। तेजी से हो रही वनों की कटाई के कारण इसका प्राकृतिक आवास लगातार सिमटता जा रहा है। 


इसके अलावा इसके आकर्षक लाल पंखों के लिए अवैध शिकार भी एक बड़ी समस्या बन चुका है। इन खतरों को देखते हुए इसे संरक्षण की आवश्यकता वाली प्रजातियों में शामिल किया गया है और पर्यावरणविद इसके संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पक्षी केवल अपनी अनोखी बनावट के कारण ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि वन पारिस्थितिकी तंत्र में भी इसकी अहम भूमिका है। फल खाने के बाद यह विभिन्न स्थानों पर बीज फैलाता है, जिससे नए पौधों और पेड़ों के उगने में मदद मिलती है। इस प्रकार यह जंगलों के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में योगदान देता है। मालूम हो कि दुनिया में कई ऐसे पक्षी और जीव-जंतु पाए जाते हैं, जो अपने अनोखे रूप-रंग और व्यवहार के कारण लोगों को हैरान कर देते हैं। 

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