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मुर्गियों के पंखों का रंग MC1R नामक जीन से होता है नियंत्रित

मुर्गियों के पंखों का रंग MC1R नामक जीन से होता है नियंत्रित

टेक्सस। मुर्गियों के पंखों का रंग मुख्य रूप से एमसी1आर नामक जीन से नियंत्रित होता है। इसी जीन में समय के साथ होने वाले बदलावों के कारण आज विभिन्न रंगों की मुर्गियां देखने को मिलती हैं। यही वजह है कि एक ही प्रजाति से संबंध रखने के बावजूद मुर्गियों के पंखों के रंगों में इतना अंतर होता है। टेक्सस ए एंड एम कॉलेज ऑफ वेटरनरी मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में पाए जाने वाले जंगली रेड जंगलफाउल से लेकर आधुनिक घरेलू मुर्गियों तक के विकासक्रम को समझने में यह अध्ययन महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। साथ ही, इससे पोल्ट्री उद्योग और प्रजनन कार्यक्रमों में भी नई जानकारी मिलने की उम्मीद है। अध्ययन में बताया गया है कि एमसी1आर जीन पिगमेंट कोशिकाओं पर मौजूद एक जैविक स्विच की तरह कार्य करता है।

जब यह सक्रिय होता है तो कोशिकाएं गहरे काले और भूरे रंग के पिगमेंट का निर्माण करती हैं, जबकि इसकी सक्रियता कम होने पर लाल और पीले रंग के पिगमेंट बनने लगते हैं। इसी प्रक्रिया के कारण मुर्गियों के पंखों में अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं। शोध की एक खास बात यह भी है कि एमसी1आर जीन केवल मुर्गियों तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यही जीन मनुष्यों सहित कई अन्य जीवों में भी त्वचा, बाल और शरीर के रंग को प्रभावित करता है। सूअर, कुत्ते और चूहों के शरीर के रंग निर्धारण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिकों ने 10,026 पक्षियों के डीएनए का विस्तृत विश्लेषण किया। अध्ययन में जंगली रेड जंगलफाउल के अलावा 393 विभिन्न नस्लों की घरेलू मुर्गियों को शामिल किया गया।


इससे शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद मिली कि घरेलू मुर्गियों में समय के साथ जीन में काफी विविधता विकसित हुई है, जबकि जंगली प्रजातियों में मूल आनुवंशिक संरचना काफी हद तक बनी हुई है। शोध में यह भी सामने आया कि केवल एक आनुवंशिक परिवर्तन से रंग निर्धारित नहीं होता। वैज्ञानिकों ने पाया कि नौ प्रमुख म्यूटेशन मिलकर एमसी1आर जीन के 18 अलग-अलग स्वरूप तैयार करते हैं। इसके पीछे जीन कन्वर्जन नामक प्रक्रिया काम करती है, जिसमें डीएनए के छोटे-छोटे हिस्से आपस में मिलकर नए आनुवंशिक संयोजन बनाते हैं। यही प्रक्रिया मुर्गियों में रंगों की इतनी व्यापक विविधता पैदा करने का प्रमुख कारण मानी जा रही है।

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