सड़क पर दौड़ रहे Electric vehicles, हादसों ने लोगों को सोचने पर किया मजबूर
सरकारी आंकड़ों ने खोली पोल, तीन साल में हुए 23,865 हादसे, 26 में लगी आग!
नई दिल्ली। सड़क पर दौड़ती इलेक्ट्रिक कार, न इंजन की आवाज, न धुआं। सब कुछ शांत, लेकिन इसके पीछे की ऐसी है जो आपको बेचैन कर सकती है। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि बीते तीन साल में इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े हजारों हादसे हुए हैं। अचानक टक्कर, कहीं धुएं के बाद आग और कहीं सवालों की लंबी कतार। सवाल यह है कि जो गाड़ी भविष्य का सपना दिखा रही है, क्या वह आज की सड़कों पर सुरक्षित है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच लोग ईवी को एक सस्ता और इकोफ्रेंडली विकल्प मान रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार भी ईवी को बढ़ावा दे रही है, ताकि पेट्रोल-डीजल पर निर्भतरता कम हो, लेकिन जितनी तेजी से इनकी लोकप्रियता बढ़ी है, उतनी ही तेजी से इनके हादसे भी सामने आए हैं, जिसके चलते नुकसान और जोखिमों पर भी चर्चा शुरू हो गई। खास तौर पर ईवी की सेफ्टी को लेकर। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन सालों में देश के अलग अलग राज्यों में इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े कुल 23,865 सड़क हादसे हुए। इनमें से 26 मामलों में वाहन में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। यह जानकारी भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने लोकसभा में दी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरा आंकड़ा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट पोर्टल से लिया गया है। इस पोर्टल पर 14 नवंबर 2022 से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अलग से जानकारी दर्ज की जाने लगी थी। आंकड़ों के मुताबिक साल 2023 में ईवी से जुड़े 5,594 हादसे हुए, जिनमें 8 आग की घटनाएं शामिल थीं।
साल 2024 में हादसों की संख्या बढ़कर 7,817 हो गई और इसमें 9 मामलों में आग लगी। वहीं 2025 में 10,454 हादसे दर्ज किए गए और इस साल भी 9 आग की घटनाएं सामने आईं। एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों की सेफ्टी को बेहतर करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड में बदलाव करते हुए 28 सितंबर 2022 को नए तकनीकी नियम जारी किए गए हैं। सभी तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कंफॉर्मिटी ऑफ प्रोडक्शन नियम जरूरी कर दिए गए। इसका मतलब यह है कि ई-रिक्शा, क्वाड्रिसाइकिल, दो पहिया और चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर वाहन तय सेफ्टी स्टैंडर्ड पर खरा उतरे। सरकार ने साफ किया है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण या इस्तेमाल को रोकने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार का फोकस सेफ्टी रूल्स को और मजबूत बनाने और जांच प्रक्रिया को सख्त करने पर है।
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