Karachi के गुल प्लाजा में अग्निकांड, एक ही दुकान से मिले 30 शव, मृतकों का आंकड़ा 60 के पार
कराची। पाकिस्तान के कराची स्थित प्रसिद्ध गुल प्लाजा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में लगी आग ने अब एक बड़ी मानवीय त्रासदी का रूप ले लिया है। बुधवार को राहत और बचाव कार्य के दौरान एक ही दुकान से 30 लोगों के शव बरामद होने के बाद इस हादसे में जान गंवाने वालों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है। प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस भीषण अग्निकांड के बाद अभी भी 80 से ज्यादा लोग लापता हैं, जिनकी तलाश में मलबे को हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। बहुमंजिला इमारत होने के कारण आग फैलने के बाद दर्जनों लोग अंदर ही फंस गए, जिन्हें बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। इस हादसे का सबसे हृदयविदारक पहलू मेजेनाइन फ्लोर पर स्थित एक क्रॉकरी की दुकान में देखने को मिला। पुलिस जांच में सामने आया है कि करीब 30 लोगों ने आग की लपटों और दम घोंटने वाले धुएं से बचने के लिए खुद को इस दुकान के भीतर बंद कर लिया था। उन्हें उम्मीद थी कि बंद दरवाजा उन्हें सुरक्षित रखेगा, लेकिन ऑक्सीजन की कमी और भीषण ताप के कारण वही दुकान उनके लिए काल बन गई। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, अब तक लगभग 48 शवों का पोस्टमार्टम पूरा किया जा चुका है, जिनमें से केवल 15 की ही पहचान संभव हो पाई है। शवों की स्थिति इतनी खराब है कि कई मामलों में केवल अवशेष ही प्राप्त हुए हैं, जिससे मृतकों की सटीक पहचान करने में फॉरेंसिक विशेषज्ञों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। घटनास्थल पर मौजूद ट्रेडर्स एसोसिएशन का दावा है कि बाजार के निकास द्वार और इमरजेंसी रैंप खुले हुए थे, साथ ही समय रहते बिजली भी काट दी गई थी।
हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों और परिजनों के मन में यह सवाल बरकरार है कि यदि निकास मार्ग खुले थे, तो इतनी बड़ी संख्या में लोग एक ही जगह पर क्यों फंस गए। इधर, मलबे के बीच अपनों की तलाश में भटकते परिवारों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गमगीन है। अस्पताल और घटनास्थल के बीच लोग अपनों की कोई भी खबर पाने के लिए बेचैन नजर आ रहे हैं। प्रशासन इस पूरी घटना की जांच कई पहलुओं से कर रहा है। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट को आग की वजह माना जा रहा है, लेकिन सावधानी के तौर पर बम निरोधक दस्ते को भी बुलाया गया है ताकि किसी भी तरह की साजिश की संभावना को खारिज किया जा सके। अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी आतंकी संलिप्तता के सबूत नहीं मिले हैं, फिर भी इमारत के विभिन्न हिस्सों से नमूने एकत्र किए गए हैं। सरकार ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव मदद और मुआवजे का भरोसा दिया है, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने एक बार फिर शहरी इलाकों में बनी बड़ी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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