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  • Wednesday, 14 October 2026
भारत के लोकतंत्र में खुलकर बहस करने की आजादी: PM Modi

भारत के लोकतंत्र में खुलकर बहस करने की आजादी: PM Modi

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की लोकतांत्रिक विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि यहां 100 से ज्यादा भाषाएं हैं, लगभग 80,000 पंजीकृत अखबार और प्रकाशन हैं, और 1,000 से अधिक सैटेलाइट टीवी चैनल्स हैं। इसके अलावा, भारत में 500 मिलियन से अधिक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता हैं। उन्होंने बताया कि भारत में अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर बहस होती है और विभिन्न दृष्टिकोणों पर जनता चर्चा करती है। मंगलवार को आयोजित न्यू इकॉनमी फोरम को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि भारत को लोकतंत्र की जननी बताया और जोर दिया कि शक्ति का असली मूल्य उसके उद्देश्य में निहित है, जिसे समझना 21वीं सदी में अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने दुनिया भर से आए डेलीगेट्स, बिजनेस और इंडस्ट्री के लीडर्स, पॉलिसी मेकर्स, और मेरे साथियों का भारत में स्वागत किया।


उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का भारत में पहली बार आयोजन हो रहा है और यह सही समय पर, सही जगह पर हो रहा है। पीएम मोदी ने कार्यक्रम आयोजकों को इस निर्णय के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि हर साल यह फोरम दुनिया भर के बेहतरीन विचारकों को एक साथ लाता है, जहां अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और वैश्विक मामलों पर गहन विमर्श होता है। इस वर्ष के फोरम की थीम दुनिया में उभरती नई पावर्स पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी में शक्ति की बदलती परिभाषा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, आज तकनीक पावर है। डेटा पावर है। नॉलेज पावर और इनोवेशन पावर है। हालांकि, असली सवाल यह नहीं है कि पावर किसके पास है, बल्कि यह है कि इसका उपयोग कैसे हो रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या तकनीक केवल कुछ लोगों को आगे बढ़ाएगी या करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर बनाएगी? क्या ज्ञान केवल कुछ लोगों की ताकत बना रहेगा या सबकी क्षमता बढ़ाएगा? प्रधानमंत्री ने भारत द्वारा विकसित मॉडलों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल पहचान और भुगतान के समाधान के लिए दुनिया भारत के मॉडल को देखती है, और जब दुनिया को प्रतिभा की आवश्यकता होती है, तो भारत के कुशल युवाओं पर भरोसा किया जाता है। आज भारत में 2000 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स हैं, जो दुनिया भर की कंपनियों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पीएम मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत जो कुछ करता है, उसका श्रेय नहीं चाहता। उन्होंने उदाहरण दिया कि दुनिया गर्व से कहती है कि भारत ने दुनिया को शून्य दिया, जिससे पूरी मानवता का लाभ हुआ, लेकिन भारत ने इसके लिए कभी रॉयल्टी नहीं मांगी।

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