Australia में भी ईंधन संकट, पीएम अल्बनीज ने बुलाई मीटिंग कहा- ये बड़ा संकट है
कैनबरा। मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने दुनिया भर में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर अब ऑस्ट्रेलिया की ईंधन आपूर्ति पर पड़ता दिख रहा है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि हालांकि देश में ईंधन की आपूर्ति फिलहाल अल्पकालिक रूप से स्थिर दिख रही है, लेकिन आने वाले महीनों में चुनौतियां और अधिक बढ़ सकती हैं। कैनबरा स्थित संसद भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक मजबूत योजना तैयार करने पर दिन-रात काम कर रही है। ऑस्ट्रेलिया अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर है, ऐसे में सरकार मलेशिया और अन्य आसियान देशों के साथ अपने सकारात्मक संबंधों का लाभ उठाने की कोशिश कर रही है ताकि आपूर्ति श्रृंखला बनी रहे। प्रधानमंत्री ने तेल संकट की गंभीरता को देखते हुए आगामी सोमवार को एक नेशनल कैबिनेट की विशेष बैठक भी बुलाई है, जिसमें राज्यों के साथ मिलकर भविष्य की रणनीति तय की जाएगी। जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा मंत्री क्रिस बोवेन ने स्थिति का आकलन करते हुए कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल की मांग में अचानक भारी वृद्धि हुई है, जिससे क्षेत्रीय ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की कमी महसूस की जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश भर के लगभग 470 सर्विस स्टेशनों पर कम से कम एक प्रकार का ईंधन पूरी तरह खत्म हो चुका है।
संकट की गहराई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऑस्ट्रेलिया में वर्तमान में केवल दो घरेलू रिफाइनरियां ही संचालित हो रही हैं। देश अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन आयात करता है, जिसका अधिकांश हिस्सा एशियाई देशों से आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि एशियाई रिफाइनरियां कच्चे तेल के लिए मुख्य रूप से मध्य पूर्व पर निर्भर हैं, जहां से तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भेजा जाता है। यदि इस समुद्री मार्ग पर तनाव के कारण यातायात बाधित होता है, तो वैश्विक तेल बाजार के साथ-साथ ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था पर भी इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है। विपक्ष ने भी सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए सुझाव दिया है कि जनता को राहत देने के लिए ईंधन एक्साइज ड्यूटी को अगले तीन महीनों के लिए आधा किया जाना चाहिए। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व के घटनाक्रमों पर टिकी हैं, क्योंकि वहां होने वाली मामूली हलचल भी ऑस्ट्रेलिया के पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगा सकती है।
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