OpenAI की फाउंडेशन में मदद करना अब पागलपन लगता है, मैं बेवकूफ था
अब माइक्रोसॉफ्ट से 150 अरब डॉलर से ज्यादा के हर्जाने की मांग कर रहे मस्क
वाशिंगटन। दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क ने अमेरिका की कोर्ट में कहा है कि चैटजीपीटी मेकर ओपनएआई की फाउंडेशन में मदद करना अब उनको पागलपन लगता है। ओपनएआई में हाई स्टेक्स को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है और बुधवार को मस्क ने गवाही दी। मस्क का आरोप है कि उनको यह भरोसा दिलाया गया था कि यह संस्था एक नॉन प्रॉफिट संगठन बनी रहेगी फिर यह आगे चलकर अपने मिशन से मुकर गई। साथ ही उन्होंने कहा कि यह एक मुनाफा कमाने वाली टेक कंपनी बन चुकी है। टेस्ला के सीईओ का ओपनएआई के को-फाउंडर के साथ तीन साल तक विवाद जारी रहा, जिसके बाद उन्होंने स्टार्टअप छोड़ने का ऐलान किया। उन्होंने बताया है कि तब तक चैटजीपीटी के सार्वजनिक लॉन्च हो चुका था और ओपनएआई का कमर्शियल तौर पर बड़ी सफलता दिला दी थी। कोर्ट केस की मदद से एलॉन मस्क एक बड़ी रकम बतौर जुर्माने की मांग कर रहे हैं।
केस से वे ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट से 150 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा के हर्जाने की मांग कर रहे हैं। कोर्ट केस के दौरान ओपनएआई के चीफ वकील विलियम साविट ने बताया है कि मस्क ने यह केस इसलिए फाइल किया है क्योंकि कंपनी ने उनकी बात नहीं मानी। वकील ने कहा कि ओपनएआई अभी भी अपने मूल सिद्धांतों पर कायम है। रिपोर्ट के मुताबिक यह केस अगर मस्क जीत जाते हैं तो चैटजीपीटी मेकर के राइवल्स को फायदा होगा। अगर हार जाते हैं तो ओपनएआई 730 अरब डॉलर वैल्यू के साथ आगे बढ़ती रहेगी। मस्क ने कोर्ट में कहा है कि सैम ऑल्टमैन और ग्रेग ब्रॉकमेन ने उनको शुरुआत में भरोसा दिलाया था कि ओपनएआई एक नॉन प्रॉफिट कंपनी रहेगी फिर उन्होंने आगे कहा कि वह मूर्ख थे जिसने उन्हें एक स्टार्टअप बनाने के लिए मुफ्त फंडिंग दी। उन्होंने बताया है कि उन्होंने करीब 38 मिलियन डॉलर की करीब मुफ्त फंडिंग दी, जिसके बाद अब करीब 800 अरब डॉलर वैल्यू वाली कंपनी बन चुकी है।
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