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  • Thursday, 30 April 2026
Iranian hackers ने लीक किया अमेरिकी डेटा, ट्रंप की बढ़ी मुश्किलें

Iranian hackers ने लीक किया अमेरिकी डेटा, ट्रंप की बढ़ी मुश्किलें

साइबर युद्ध की आग में अमेरिका-ईरान

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां युद्ध केवल जमीन, आसमान और समंदर तक सीमित नहीं रहा। मिसाइलों और किलर ड्रोन्स के बीच अब मिडिल ईस्ट में भीषण साइबर वॉर छिड़ गई है। ईरानी हैकर्स ने एक ऐसा बड़ा हमला किया है जिसने वॉशिंगटन के रणनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। दावों के मुताबिक, तेहरान से जुड़े एक हैकर ग्रुप ने अमेरिकी नौसेना (यूएस नेवी) के बेहद संवेदनशील डेटा में सेंध लगा दी है। इस साइबर हमले में पश्चिम एशिया में तैनात करीब 2,000 से अधिक अमेरिकी नौसैनिकों की निजी जानकारी लीक कर दी गई है। ‘हंडाला’ नाम के एक हैकर ग्रुप ने टेलीग्राम पर यह डेटा साझा किया है। मामला तब और गंभीर हो गया जब सैनिकों को व्हाट्सएप के जरिए सीधे धमकी भरे संदेश मिलने लगे। इन संदेशों में दावा किया गया है कि हैकर्स के पास न केवल सैनिकों का डेली रूटीन है, बल्कि उनके परिवारों और घर के पतों की भी सटीक जानकारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिजिटल हमले का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी सैनिकों का मनोबल तोड़ना और उनकी सुरक्षा व्यवस्था को दुनिया के सामने मजाक बनाना है। पेंटागन के अधिकारी इस ब्रीच की जांच में जुटे हैं और शुरुआती पड़ताल में लीक हुआ कुछ डेटा सही पाया गया है। वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है।

ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि ईरान बर्बादी की कगार पर है और ईरानी अधिकारी समुद्री मार्ग होर्मुज को खोलने के लिए उनके सामने गिड़गिड़ा रहे हैं। हालांकि, साइबर हमले और जमीनी हकीकत ट्रंप के इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। ट्रंप ने अपने ताजा बयान में आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा है कि वे अब और अच्छे आदमी बनकर नहीं रह सकते। वे ईरान पर नए परमाणु समझौते के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं, लेकिन ईरान झुकने को तैयार नहीं है। समंदर के मोर्चे पर भी हालात बदतर होते जा रहे हैं। अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह ठप करने के लिए सख्त नौसैनिक नाकेबंदी कर दी है। इसके जवाब में ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रतिबंध नहीं हटते, होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता नहीं खुलेगा। दोनों देशों की इस जिद का खामियाजा पूरी दुनिया भुगत रही है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जिससे आने वाले दिनों में ईंधन का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल, डिजिटल और समुद्री मोर्चे पर मची यह अफरा-तफरी किसी बड़े सैन्य टकराव की आहट दे रही है।

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