ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण 1 हजार साल पुराने सिक्के मिले
ओस्लो। नॉर्वे के वेस्ट्रे स्लिड्रे क्षेत्र में एक मेटल डिटेक्टरिस्ट द्वारा की गई खोज ने इतिहास प्रेमियों और पुरातत्वविदों को चौंका दिया है। यहां प्राचीन सोने का सिक्का हाथ लगा, जिसकी उम्र लगभग 1,000 साल बताई जा रही है। यह सिक्का ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इस पर ईसा मसीह की तस्वीर बनी हुई है। इस खोज के बाद विशेषज्ञों ने इसे नॉर्वे के लिए दुर्लभ और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है। सिक्के की खोज के बारे में मियामी हेराल्ड और अन्य प्रमुख मीडिया संस्थानों ने भी रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें बताया गया कि यह सिक्का अपने मूल स्थान से 1,600 मील से अधिक दूरी पर पाया गया। यह खोज न केवल पुरातत्वविदों के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि प्राचीन काल में विभिन्न संस्कृतियों और साम्राज्यों के बीच किस तरह का संपर्क रहा होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दुर्लभ सिक्का बिजैंटाइन साम्राज्य की राजधानी कॉन्स्टेंटिनोपल में 977 से 1025 के बीच ढाला गया था।
सिक्के के एक तरफ ईसा मसीह को बाइबिल पकड़े हुए दर्शाया गया है और उसके नीचे लैटिन भाषा में लिखा है, ईसा मसीह, शासन करने वालों का राजा। वहीं, सिक्के के दूसरी तरफ उस समय के दो सम्राटों, बेसिल II और कॉन्स्टेंटाइन VII, की छवियां हैं। इन छवियों के नीचे ग्रीक भाषा में लिखा वाक्य बेसिल और कॉन्स्टेंटाइन, रोमन के सम्राट का अनुवाद है। इतिहासकार इस बात पर हैरान हैं कि एक बिजैंटाइन साम्राज्य का सिक्का नॉर्वे में कैसे पहुंचा। इसके पीछे एक प्रमुख परिकल्पना यह है कि यह सिक्का 1045 से 1066 के बीच नॉर्वे के राजा हेराल्ड हार्डरोड, जिन्हें हेराल्ड द रूथलेस भी कहा जाता था, का हो सकता है। हेराल्ड पहले बिजैंटाइन सम्राट का अंगरक्षक हुआ करता था और उसने तीन सम्राटों की मृत्यु अपनी आंखों से देखी थी। उन समयों में सम्राटों की मृत्यु के बाद खजाने लूटे जाते थे। संभवतः हेराल्ड ने ऐसा ही कोई खजाना अपने कब्जे में लिया हो और इसे नॉर्वे लाया हो, जहां यह सिक्का खो गया।
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