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Bangladesh में राष्ट्रपति चुनाव: बीएनपी ने फखरुल को बनाया उम्मीदवार, जीत की संभावना मजबूत

Bangladesh में राष्ट्रपति चुनाव: बीएनपी ने फखरुल को बनाया उम्मीदवार, जीत की संभावना मजबूत

ढाका। बांग्लादेश की सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने लंबे समय तक पार्टी महासचिव रहे और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के करीबी सहयोगी मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है। देश में राष्ट्रपति चुनाव 20 अगस्त को होना है। आलमगीर के उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उनके अगले राष्ट्रपति बनने की संभावना मजबूत मानी जा रही है। बीएनपी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई पार्टी की स्थायी समिति की बैठक में 78 वर्षीय आलमगीर के नाम पर फैसला लिया गया। पार्टी के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रूहुल कबीर रिजवी ने बताया कि राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद आलमगीर ने महासचिव के पद और पार्टी की सर्वोच्च नीतिगत संस्था स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया है। रिजवी ने कहा कि आलमगीर बीएनपी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होंगे। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी ने अपने गठबंधन सहयोगी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त कर्नल ओली अहमद को राष्ट्रपति पद के लिए मैदान में उतारा है। अहमद अपना नामांकन निर्वाचन आयोग में दाखिल कर चुके हैं।


बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता नहीं करती, बल्कि संसद के सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। संविधान के अनुसार राष्ट्रपति पद रिक्त होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराना जरूरी है। वर्तमान में संसद अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद संवैधानिक प्रावधानों के तहत कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।राष्ट्रपति चुनाव कराने की जरूरत पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद पड़ी। उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते पिछले महीने उन्होंने पद छोड़ दिया था। शहाबुद्दीन को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना का करीबी माना जाता था।12 फरवरी को हुए चुनाव में सत्ता में आई बीएनपी के पास संसद में दो-तिहाई बहुमत है। ऐसे में पार्टी के उम्मीदवार आलमगीर की जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है। निर्वाचित होने पर वह बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति होंगे।आलमगीर एक दशक से अधिक समय से बीएनपी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं। उन्होंने 2011 से कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी संभाली और 2016 में औपचारिक रूप से महासचिव बने। खालिदा जिया के जेल में रहने और तारिक रहमान के विदेश में रहने के दौरान उन्होंने पार्टी संगठन और नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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