मिडटर्म में Trump हारे तो ईरान पर हो सकता है बड़ा सैन्य हमला
वाशिंगटन। अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिडटर्म चुनावों के परिणामों के बाद ईरान के खिलाफ एक बार फिर बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि यदि इन चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ता है, तो ट्रंप ईरान के खिलाफ और अधिक आक्रामक रुख अपनाते हुए कड़े सैन्य हमलों का आदेश दे सकते हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने इस दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि चुनावी नतीजे राष्ट्रपति के रणनीतिक फैसलों को प्रभावित नहीं करेंगे।
हाल ही में फ्लोरिडा में अपनी चुनावी रैलियों और एक रेडियो इंटरव्यू के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ चल रहा यह टकराव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है। समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने यहां तक कहा कि अमेरिका एक और छोटा एपिक फ्यूरी ऑपरेशन चला सकता है, या फिर ईरान को खुद समझदारी दिखाते हुए बातचीत के रास्ते पर आना होगा। गौरतलब है कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी इसी सालफरवरी में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के मिसाइल और परमाणु ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए शुरू किया गया एक व्यापक सैन्य अभियान था।युद्ध के इन रणनीतिक विकल्पों पर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर, रक्षा मंत्री और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष ने व्हाइट हाउस का अचानक दौरा किया था। इन शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के विरुद्ध दोबारा बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करने के विभिन्न विकल्पों पर विस्तृत ब्रीफिंग दी है। इसके अलावा, अमेरिकी प्रशासन ने खाड़ी देशों के नेताओं को भी चुनावों के बाद एक छोटे लेकिन बेहद भीषण सैन्य अभियान के लिए तैयार रहने का कूटनीतिक संदेश भेजा है।
यह पूरा संघर्ष अमेरिका के घरेलू राजनीतिक गलियारों में भी ट्रंप के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पेंटागन द्वारा कांग्रेस को सौंपे गए आंकड़ों के अनुसार, इस युद्ध के शुरुआती साढ़े सात महीनों में ही अमेरिकी जनता का 47 अरब डॉलर से अधिक का भारी-भरकम फंड खर्च हो चुका है। वहीं, एक हालिया सर्वे के मुताबिक केवल 35 प्रतिशत पंजीकृत मतदाता ही ईरान संघर्ष से निपटने के ट्रंप के तरीकों का समर्थन कर रहे हैं।शिंगटन का मुख्य लक्ष्य जहां ईरान को परमाणु हथियार संपन्न बनने से रोकना है, वहीं वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार के लिए बेहद संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा इस तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है।
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