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  • Wednesday, 04 February 2026
इस्माइली मुस्लिम आध्यात्मिक नेता Prince Karim Aga Khan चतुर्थ का निधन

इस्माइली मुस्लिम आध्यात्मिक नेता Prince Karim Aga Khan चतुर्थ का निधन

विकासशील देशों में घर, अस्पताल और स्कूलों का करवाया निर्माण

लिस्बन। दुनिया भर में फैले लाखों शिया इस्माइली मुसलमानों के आध्यात्मिक नेता प्रिंस करीम अल-हुसैनी आगा खान चतुर्थ का निधन हो गया है। मंगलवार को 88 साल की उम्र में लिस्बन (पुर्तगाल) में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह महज 20 साल की उम्र में इस्माइली मुसलमानों के 49वें इमाम और आध्यात्मिक नेता बने थे। उन्होंने अपना जीवन लोक कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने इस्माइली मुसलमानों का आध्यात्मिक नेतृत्व करने के साथ ही अरबों डॉलर की मदद से विकासशील देशों में घरों, अस्पतालों और स्कूलों का निर्माण कराकर अलग पहचान भी बनाई। प्रिंस करीम अल-हुसैनी आगा खान चतुर्थ के परिवार को पैगंबर मोहम्मद साहब का वंशज माना जाता है। वह पैगंबर मुहम्मद साहब की बेटी हजरत बीबी फातिमा और पैगंबर साहब के दामाद हजरत अली, इस्लाम के चौथे खलीफा और पहले शिया इमाम के वंशज थे। वह प्रिंस अली खान के सबसे बड़े बेटे और दिवंगत सर सुल्तान मोहम्मद शाह आगा खान तृतीय के पोते और इमाम के पद के उत्तराधिकारी थे। प्रिंस करीम आगा खान उस समय केवल 20 साल के थे जब उनके दादा ने 1957 में अपने बेटे अली खान को दरकिनार कर उन्हें अपना उत्तराधिकारी चुनते हुए कहा था कि यह जिम्मेदारी एक ऐसे युवा व्यक्ति को दी जानी चाहिए, जो नए विचारों के बीच पला-बढ़ा हो। प्रिंस करीम आगा खान को जब आध्यात्मिक नेतृत्व सौंपा गया तो उस समय उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया था।

प्रिंस करीम आगा खान चतुर्थ ने अपने पूरे जीवन में इस बात पर जोर दिया कि इस्लाम एक विचारशील, आध्यात्मिक विश्वास है जो करुणा और सहिष्णुता सिखाता है और मानव जाति की गरिमा को बनाए रखता है। उन्होंने अपना जीवन समुदाय और उन देशों के लोगों की जीवन स्थिति में सुधार करने के लिए समर्पित कर दिया, जिनमें वे रहते हैं, चाहे उनकी जाति, लिंग, जातीयता या धर्म कुछ भी हो। प्रिंस आगा खान चतुर्थ ने आगा खान विकास नेटवर्क की स्थापना की। इस नेटवर्क के जरिये 96000 लोगों को रोजगार मिला है। आगा खान विकास नेटवर्क स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा आवास और आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करता है। उनका काम कई देशों में फैला है, जिनमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और ताजिकिस्तान समेत कई देश शामिल हैं। इस्माइली मुसलमान सबसे पहले 950 साल पहले अफगानिस्तान के खैबर प्रांत से सिंध प्रांत आए और फिर भारत पहुंचे। इस वक्त पूरी दुनिया में इस्माइली मुस्लिम समुदाय के लोगों की जनसंख्या 1.5 करोड़ के करीब है। इस्माइली मुसलमान को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इन्हें खोजा मुस्लिम, आगाखानी मुस्लिम और निजारी मुस्लिम भी कहते हैं। इस्माइली मुसलमान जहां इबादत करते हैं उसे जमातखाना कहा जाता है। जहां पर महिलाएं भी पुरुषों के साथ इबादत करती है। इस्माइली मुसलमान राजनीतिक विवादों से खुद को दूर रखते हैं।

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