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  • Monday, 19 January 2026
Hawai के घने जंगलों में ड्रोन से गिराए मच्छरों से भरे बायोडिग्रेडेबल पॉड

Hawai के घने जंगलों में ड्रोन से गिराए मच्छरों से भरे बायोडिग्रेडेबल पॉड

लुप्त होती हनीक्रीपर चिड़ियों को बचाने मच्छरों के अंदर डाला बैक्टीरिया

हवाई। हवाई के घने जंगलों में आसमान से ड्रोन के जरिए छोटे-छोटे बायोडिग्रेडेबल पॉड्स गिराए गए। हर एक पॉड में करीब एक हजार मच्छर थे, लेकिन ये मच्छर इंसानों को काटने वाले नहीं, बल्कि खास लैब में तैयार किए गए नर मच्छर थे। इन मच्छरों के अंदर एक ऐसा बैक्टीरिया था, जो मादा मच्छरों से मिलने के बाद अंडों को फूटने नहीं देता है। इस खास तकनीक का मकसद है हवाई की लुप्त होती चिड़ियों को बचाना। हवाई की सुंदर और रंग-बिरंगी चिड़ियां जैसे ‘हनीक्रीपर’ कभी बहुत संख्या में पाई जाती थीं, लेकिन आज इनकी संख्या घट रही है। पहले हनीक्रीपर की 50 से ज्यादा प्रजातियां थीं, लेकिन अब सिर्फ 17 ही बची हैं और उनमें से ज़्यादातर संकट में हैं। इन चिड़ियों का पर्यावरण में बड़ा रोल है। ये फूलों से पराग फैलाती हैं और बीजों को भी एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं। पिछले साल एक छोटी सी चिड़िया ‘आकिकिकी’ जंगलों से करीब खत्म हो गई और अब ‘अकेके’ नाम की एक और प्रजाति के सिर्फ 100 से कम पक्षी बचे हैं। इनका मरना सिर्फ पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि हवाई की सांस्कृतिक पहचान के लिए भी बड़ा नुकसान है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन चिड़ियों के गायब होने के पीछे सबसे बड़ा कारण है एवियन मलेरिया यानी पक्षियों को होने वाला मलेरिया। ये बीमारी मच्छरों के ज़रिए फैलती है।

दरअसल मच्छर हवाई में पहले नहीं थे। 1826 में पहली बार जब व्हेल पकड़ने वाले जहाज यहां आए, तो उनके साथ मच्छर भी यहां पहुंच गए। तब से ये मच्छर वहां के वातावरण में मौजूद हैं और चिड़ियों के लिए खतरा बन गए हैं, क्योंकि इन चिड़ियों के शरीर में इस बीमारी से लड़ने की ताकत नहीं थी। पहले चिड़ियां मच्छरों से बचने के लिए पहाड़ों की ऊंचाई पर चली गईं, जहां ठंड होने की वजह से मच्छर नहीं पहुंचते थे, लेकिन अब जलवायु परिवर्तन यानी ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से ऊंचे पहाड़ों पर भी तापमान बढ़ रहा है और मच्छर वहां तक पहुंचने लगे हैं। पक्षियों को बचाने के लिए जून में वैज्ञानिकों ने तकनीक पर काम किया। इसमें नर मच्छरों के अंदर एक बैक्टीरिया डाला जाता है। ये मच्छर जब जंगल की मादा मच्छरों से मेल करते हैं, तो उनके अंडे नहीं फूटते। इससे धीरे-धीरे मच्छरों की संख्या घटने लगती है। 2016 में अमेरिकन बर्ड कंटरवर्सी और बर्डस् नॉट मास्किटो नाम के संगठन ने इस तकनीक पर रिसर्च की। कैलिफोर्निया की एक लैब में लाखों मच्छर तैयार किए गए और फिर उन्हें हवाई के माउई और कौआई द्वीपों में छोड़ा गया। हर हफ्ते करीब 10 लाख मच्छर छोड़े जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में हेलिकॉप्टर से मच्छर छोड़ना महंगा और मुश्किल था। इसीलिए अब ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह तरीका सस्ता, सुरक्षित और मौसम के मुताबिक ज्यादा लचीला है। ड्रोन के ज़रिए मच्छर उन जगहों पर छोड़े जा रहे हैं जहां हेलिकॉप्टर नहीं पहुंच सकते हैं।

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