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  • Tuesday, 08 September 2026
संवेदनशील देशों के लिए जलवायु न्याय सुनिश्चित करने ठोस उपाय किए जाएं, Nepal के राष्ट्रपति पौडेल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से किया आह्वान

संवेदनशील देशों के लिए जलवायु न्याय सुनिश्चित करने ठोस उपाय किए जाएं, Nepal के राष्ट्रपति पौडेल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से किया आह्वान

काठमांडू। नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नेपाल और अन्य पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील देशों के लिए जलवायु न्याय सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी उपाय करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हाल की आपदा ने हिमालयी पर्यावरण की असाधारण नाजुकता को उजागर किया है। सोमवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति पौडेल ने कहा कि इस आपदा ने एक बार फिर लगातार बढ़ते वैश्विक तापमान से उत्पन्न जोखिमों को उजागर किया है, क्योंकि नेपाल में तबाही मचाने वाली घातक बाढ़ में हुई जानमाल की हानि पर शोक मना रहा है। उन्होंने कहा कि यह आपदा न केवल हमारे हिमालयी पर्यावरण की असाधारण नाजुकता को दर्शाती है, बल्कि इसने हमें लगातार बढ़ते वैश्विक तापमान से उत्पन्न होने वाले जोखिमों के बारे में एक बार फिर गंभीरता से अवगत कराया है। पौडेल की यह अपील नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के मद्देनजर आई है, जिसमें राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण की नवीनतम जानकारी के मुताबिक अब तक 1,356 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 4,994 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।


बता दें 26 अगस्त को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान पहुंचाया और घरों, सड़कों, पुलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को क्षति पहुंचाई। पौडेल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे न केवल नेपाल और अन्य संवेदनशील देशों की चिंताओं को सुनें, बल्कि जलवायु संकट और उसके परिणामों से निपटने के लिए सार्थक कार्रवाई भी करें। राष्ट्रपति की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब नेपाल अपने पर्वतीय और नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों में जलवायु संबंधी बढ़ते जोखिमों का सामना कर रहा है, हालांकि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में देश का योगदान अपेक्षाकृत कम है। राष्ट्रपति ने आपदा के बाद नेपाल की सहायता के लिए खोज एवं बचाव कर्मियों, तकनीकी विशेषज्ञों, चिकित्सा टीमों और आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति करने के लिए पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को धन्यवाद दिया। भारत, चीन और कई अन्य देश बाढ़ से प्रभावित लोगों के बचाव और राहत कार्यों के लिए आर्थिक, भौतिक और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं।

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