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  • Tuesday, 11 August 2026
नई आहट: Japan ने फिलीपींस पर दागी मिसाइल, भड़क उठा चीन

नई आहट: Japan ने फिलीपींस पर दागी मिसाइल, भड़क उठा चीन

टोक्यो। दक्षिण चीन सागर के सामरिक जलक्षेत्र में बुधवार को एक ऐसी सैन्य घटना घटी जिसने पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कूटनीतिक और सुरक्षा गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। फिलीपींस और अमेरिका के बीच चल रहे वार्षिक बालिकातन युद्धाभ्यास के दौरान जापान की सेल्फ-डिफेंस फोर्स ने अपनी टायप 88 एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस मिसाइल ने फिलीपींस के एक पुराने युद्धपोत को कुछ ही मिनटों में निशाना बनाकर नष्ट कर दिया। चीन ने इस मिसाइल परीक्षण पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने इसे पिछले 80 वर्षों में जापान द्वारा किया गया पहला ऑफेंसिव मिसाइल टेस्ट करार दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने जापान पर नियो-मिलिटेरिज्म (नया सैन्यवाद) को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान की शांतिवादी और रक्षात्मक नीति से एक खतरनाक विचलन है। चीन के अनुसार, जापान का दोबारा सैन्य शक्ति बढ़ाना एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अच्छा संकेत नहीं है। यह सैन्य अभ्यास फिलीपींस के उत्तरी इलाके पाओय के तट से करीब 75 किलोमीटर दूर आयोजित किया गया, जो सीधे दक्षिण चीन सागर का हिस्सा है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक नियमित अभ्यास नहीं, बल्कि बीजिंग के लिए एक सीधा संदेश है। जिस क्षेत्र में यह मिसाइल दागी गई, वहां चीन लंबे समय से अपना दावा पेश करता रहा है।

ऐसे में जापान का इस विवादित क्षेत्र के पास पहली बार इतनी आक्रामक भूमिका निभाना एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। जापान ने इस अभ्यास के दौरान दो मिसाइलें दागीं, जिन्होंने फिलीपींस नौसेना के पुराने जहाज पर सटीक प्रहार किया। इस पूरे ऑपरेशन का निरीक्षण फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो टेओडोरो और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने मौके पर मौजूद रहकर किया, जबकि फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने मनीला से इसका सीधा प्रसारण देखा। यह पहली बार है जब जापान ने बालिकातन युद्धाभ्यास में इतनी सक्रिय और आक्रामक भूमिका निभाई है। हाल के वर्षों में जापान ने अपने सैन्य निर्यात और रक्षात्मक नीतियों पर लगे दशकों पुराने प्रतिबंधों में ढील दी है। इसी कड़ी में जापान और फिलीपींस के बीच रक्षा सहयोग बढ़ रहा है और अबुकुमा क्लास डेस्ट्रॉयर जैसे युद्धपोत देने पर भी चर्चा चल रही है। इस युद्धाभ्यास में अमेरिका और जापान के अलावा कनाडा, फ्रांस और न्यूजीलैंड जैसे देशों की भागीदारी ने इस क्षेत्र में एक मजबूत सुरक्षा नेटवर्क की झलक पेश की है।

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