लोग बोलते थे, तुमको तो एक्टिंग-वैक्टिंग कुछ आता नहीं: Amitabh
मुंबई। बॉलीवुड के सुपर स्टार अमिताभ बच्चन आज जिस मुकाम पर हैं, उनका यहां तक पहुंचने का सफर बिलकुल भी आसान नहीं रहा है। सफलता मिलने से पहले बिग बी ने जिंदगी में अनेक-उतार चढाव देखे। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का शुरुआती करियर चुनौतियों से भरा था, जहां उन्हें भी रिजेक्शन और कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया का सपना हर कोई देखता है, लेकिन जो लंबे संघर्ष और रिजेक्शन जैसी मुश्किलों को पार कर जाता है, वही सुपरस्टार कहलाता है। हाल ही में क्विज रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति सीजन-18 के एक खास एपिसोड में, अमिताभ बच्चन ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की गोल्ड मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन, जसवंत कुमार, शर्मिला धनकर और अस्मिता डे के साथ बातचीत के दौरान अपने संघर्ष के दिनों की यादें साझा कीं। शो के दौरान, अस्मिता ने मेगास्टार से पूछा कि क्या एथलीट्स की तरह एक्टर्स को भी फिल्म सेट पर डायरेक्टर्स से डांट खानी पड़ती है। इस सवाल के जवाब में अमिताभ बच्चन ने बताया कि जब वो इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे, तब उन्हें कितनी आलोचनाएं सुननी पड़ी थीं। उन्होंने भावुक होकर कहा, हमको बड़ी डांटे पड़ती थीं, शुरू-शुरू में तो लोग बोलते थे कि तुमको तो एक्टिंग-वैक्टिंग कुछ आता ही नहीं, बहुत लंबे हो अपने घर जाओ। ऐसी बातें सुनना किसी भी उभरते कलाकार के लिए बेहद डिशेरटेंनिंग हो सकता है, लेकिन अमिताभ बच्चन ने हार नहीं मानी।
उन्होंने आगे याद किया कि आखिरकार काम मिलने के बाद भी आलोचनाएं बंद नहीं हुईं। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया, आमतौर पर हममें से सभी समय पर पहुंचने का प्रयास करते हैं, लेकिन एक बार मुझे पहुंचने में देर हो गई। सेट के बाहर डायरेक्टर खड़े थे और हम किसी और की गाड़ी लेकर पहुंचे, तब हमारे पास अपनी गाड़ी नहीं हुआ करती थी। सेट पर हम जैसे ही पहुंचे, तो डायरेक्टर ने हमें फिल्म से ही निकाल दिया था। यह घटना उनके शुरुआती करियर की अनिश्चितताओं और संघर्ष को दर्शाती है। बता दें कि अभिनेता अमिताभ बच्चन पिछले पांच दशकों से ज्यादा समय से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का हिस्सा हैं। सिनेमा से उनका पहला जुड़ाव एक्टिंग में आने से पहले एक वॉइस-ओवर आर्टिस्ट के तौर पर हुआ था। साल 1969 में उन्होंने मृणाल सेन की भुवन शोम में अपनी खास बैरिटोन आवाज दी थी। यह एक कम बजट की फिल्म थी जो भारत के पैरेलल सिनेमा मूवमेंट का एक लैंडमार्क बन गई। इस भूमिका ने उनकी आवाज की दमदार पहचान बनाई, भले ही एक्टिंग में उन्हें अभी तक अपनी जगह बनानी बाकी थी। अमिताभ बच्चन का यह सफर दिखाता है कि सफलता के शिखर पर पहुंचने के लिए कितने धैर्य और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है।
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