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RBI MPC बैठक शुरू, रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम, विशेषज्ञों को दरें स्थिर रहने का अनुमान

RBI MPC बैठक शुरू, रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम, विशेषज्ञों को दरें स्थिर रहने का अनुमान

नई ‎दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की महत्वपूर्ण त्रि-दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो गई है। इस बैठक में देश की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ ब्याज दरों, विशेषकर रेपो रेट, की गहन समीक्षा की जाएगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा बुधवार सुबह 10 बजे समिति के फैसलों की घोषणा करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों और घरेलू महंगाई के दबाव के चलते रेपो रेट को मौजूदा 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा जा सकता है। यह द्विमासिक बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया वैश्विक अस्थिरता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दर में वृद्धि और बॉन्ड यील्ड के उच्च स्तर पर पहुंचने जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इन वैश्विक कारकों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों का भी समिति आकलन करेगी। कई विश्लेषकों का अनुमान है कि छह सदस्यीय एमपीसी रेपो रेट को मौजूदा 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रख सकती है।

एसबीआई रिसर्च ने भी अपनी रिपोर्ट में दरों को अपरिवर्तित रखने की संभावना जताई है, क्योंकि अगले दो तिमाहियों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के 5 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद है। हालांकि, घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत भी मिले हैं, जो एक सकारात्मक पहलू है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक हो सकती है, जो पहले के अनुमानों से अधिक है। इसके बावजूद, तेल की कीमतों में अस्थिरता, रुपये पर दबाव और बाहरी पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव के कारण केंद्रीय बैंक की ओर से स्पष्ट रूप से नरम टिप्पणी आने की संभावना कम है। हालांकि, जुलाई में मजबूत पूंजी प्रवाह, विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार और बेहतर मानसून जैसी घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए कुछ सकारात्मक कारक भी मौजूद हैं। इससे पहले जून में हुई एमपीसी की बैठक में सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा गया था और अपने पॉलिसी रुख को तटस्थ रखा गया था। उस समय केंद्रीय बैंक ने भू-राजनीतिक तनाव के बीच वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान भी संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया था।

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