August में इक्विटी म्युचुअल फंड में कुल 29,329 करोड़ का शुद्ध निवेश आया
- स्मॉलकैप फंड में निवेशकों ने 7,973 करोड़ किए निवेश, लार्ज कैप से निकला पैसा
नई दिल्ली। म्युचुअल फंड निवेशकों का स्मॉलकैप और मिडकैप फंड पर भरोसा बना हुआ है। अगस्त 2026 में इक्विटी म्युचुअल फंड में कुल 29,329 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया। इसमें सबसे ज्यादा पैसा स्मॉलकैप फंड में आया। अकेले इस कैटेगरी में निवेशकों ने 7,973 करोड़ रुपए लगाए। वहीं दूसरी तरफ लार्जकैप फंड से 1,147 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी हुई यानी निवेशक बड़ी कंपनियों वाले फंड से पैसा निकाल रहे हैं, जबकि छोटी और मझोली कंपनियों वाले फंड में निवेश जारी है। हालांकि फंड मैनेजर ने स्मॉलकैप में पैसा लगाते समय केवल हाल की तेजी देखकर फैसला नहीं करने की सलाह दी है।
आंकड़ों के मुताबिक इक्विटी स्कीम में कुल 73,614 करोड़ रुपए जुटाए गए, जबकि 44,285 करोड़ रुपए की निकासी हुई। इस तरह शुद्ध निवेश 29,328.62 करोड़ रुपए रहा। अलग-अलग कैटेगरी देखें तो स्मॉलकैप फंड में 7,973.33 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया, जो इक्विटी कैटेगरी में सबसे ज्यादा है। इसके बाद मिडकैप फंड में 6,989.40 करोड़ रुपए और फ्लेक्सीकैप फंड में 5,059.42 करोड़ रुपए आए। लार्ज एंड मिडकैप फंड में 3,872.79 करोड़ और मल्टीकैप फंड में 3,732.77 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया यानी सिर्फ मिडकैप और स्मॉलकैप फंड को मिला दें तो अगस्त में इनमें करीब 14,963 करोड़ रुपए का निवेश आया। यह कुल इक्विटी फंड निवेश के आधे से ज्यादा के बराबर है। जहां छोटी और मझोली कंपनियों वाले फंड में पैसा आया, वहीं लार्जकैप फंड का आंकड़ा इसके बिल्कुल उलट रहा। अगस्त में लार्जकैप फंड में 4,509 करोड़ रुपए जुटाए गए, लेकिन करीब 5,656 करोड़ रुपए की निकासी हुई। इस तरह इस कैटेगरी से 1,147.36 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इसके अलावा ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड से भी 1,078 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी हुई। सेक्टोरल फंड में 53 करोड़ रुपए और डिविडेंड यील्ड फंड में करीब 134 करोड़ रुपए की निकासी दर्ज की गई।
आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी के मुख्य निवेश अधिकारी, इक्विटी हरीश कृष्णन का कहना है कि इक्विटी फंड में लगातार मजबूत निवेश यह दिखाता है कि निवेशकों का शेयर बाजार पर भरोसा बना हुआ है। स्मॉलकैप के बाद मिडकैप और फ्लेक्सीकैप में ज्यादा पैसा आना व्यापक बाजार में निवेशकों की लगातार भागीदारी और भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ पर उनके भरोसे को दिखाता है। हालांकि, उन्होंने स्मॉलकैप को लेकर सावधानी की बात भी कही है। उनके मुताबिक स्मॉलकैप कंपनियों के वैल्यूएशन और कारोबारी मजबूती में काफी अंतर है। इसलिए इस हिस्से में सही कंपनियों को चुनना अहम है।
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