Dark Mode
Iran के नाम पर अकड़ रहा था पिद्दी सा देश, अब अमेरिका ने किया तलब, बढ़ी हलचल

Iran के नाम पर अकड़ रहा था पिद्दी सा देश, अब अमेरिका ने किया तलब, बढ़ी हलचल

वाशिंगटन। वाशिंगटन में अमेरिका और मालदीव के बीच हालिया बयानों को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिका ने मालदीव से उस बयान पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिसमें वहां के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिका और इजरायल की आलोचना की थी। इस मुद्दे पर अमेरिकी विशेष दूत और विदेश विभाग के एक अधिकारी ने मालदीव की विदेश मंत्री से मुलाकात की। अमेरिकी विशेष दूत सर्गियो गोर और विदेश विभाग की अधिकारी बेथले मॉरिसन ने मालदीव की विदेश मंत्री इरुथिशाम अदम से बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों और हालिया बयानों पर गहन चर्चा हुई। इससे पहले, मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू ने साफ कहा था कि वह अपने देश की किसी भी जमीन या संसाधन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ युद्ध में नहीं होने देंगे। उन्होंने अमेरिका और इजरायल के हमलों की कड़ी आलोचना भी की थी, जिससे दोनों देशों के बीच कुछ समय के लिए तनाव बढ़ गया था। बातचीत के बाद, अमेरिकी पक्ष ने बताया कि मालदीव की विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति के बयानों को स्पष्ट किया और यह दोहराया कि मालदीव अमेरिका के साथ सकारात्मक रिश्ते बनाए रखना चाहता है। अमेरिका ने भी भविष्य में सहयोग जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देश अपने संबंधों को सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

गौरतलब है कि मार्च में जब सर्गियो गोर मालदीव की राजधानी माले गए थे, तब राष्ट्रपति मुइज्जू ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था। हालांकि, गोर ने उस दौरान मालदीव के विदेश और रक्षा मंत्रियों से मुलाकात की थी। दोनों देशों के संबंधों की बात करें तो अमेरिका और मालदीव के बीच कूटनीतिक रिश्ते 60 साल पूरे कर चुके हैं। हाल ही में अमेरिका ने माले में अपने मिशन प्रमुख के लिए स्थायी आवास भी स्थापित किया है, जो दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। ईरान से जुड़े इस संघर्ष में मालदीव ने सीधे तौर पर कोई सैन्य भूमिका नहीं निभाई है, लेकिन उसकी राजनीतिक और कूटनीतिक स्थिति महत्वपूर्ण रही है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने स्पष्ट किया है कि उनका देश किसी भी तरह से अपने क्षेत्र, बंदरगाह या संसाधनों का इस्तेमाल युद्ध में नहीं होने देगा। उन्होंने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की सार्वजनिक रूप से आलोचना भी की है। एक मुस्लिम बहुल देश होने के नाते मालदीव ने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाए रखी है, लेकिन साथ ही वह अमेरिका जैसे बड़े देश के साथ अपने कूटनीतिक संबंध भी बनाए रखना चाहता है।

Comment / Reply From

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!