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  • Sunday, 18 October 2026
'Smart City' की ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त, हालात बेहद खराब, गंदगी और गहरे गडढे स्मार्ट शहर के जख्मों पर छिड़क रहे नमक

'Smart City' की ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त, हालात बेहद खराब, गंदगी और गहरे गडढे स्मार्ट शहर के जख्मों पर छिड़क रहे नमक

ग्वालियर। ग्वालियर का नाम स्मार्ट शहरों में आता है। ग्वालियर स्मार्ट सिटी में अपराध और जाम बेशुमार है। वहीं गंदगी और खंड खंड सड़कें अपार है। सड़कों पर पसरे गहरे गहरे गडढे स्मार्ट शहर के जख्मों पर नमक छिड़कते नजर आते है। यातायात पुलिस नुक्कड़ों, चौराहे पर मशीन लेकर खड़ी रहती है। लेकिन यातायात सुधार पर काम नहीं होता है। पुलिस के सामने ही जाम लगा रहा है और यातायात पुलिस रसीद काटने में लगी रहती है। ग्वालियर स्मार्ट सिटी के नाम पर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। हर चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल तो लगाए गए हैं किंतु वे वीआईपी लोगों के लिए नहीं हैं। अक्सर वीआईपी वाहन इन चौराहों पर सिग्नल तोड़ते हुए आगे बढ़ जाते हैं। वहीं सामान्य वाहन चालकों को शिकंजे में लेकर चालानी कार्रवाई की जा रही है। आलम ये है कि वाहन चालकों के हेलमेट का प्रयोग न करने पर चालान काटे जा रहे हैं। ट्रैफिक व्यवस्था के नाम शहर की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। मुख्य बाजारों में रेडलाइट सिग्नल का पालन नहीं होता है। वहीं सड़कों की बदहाली, अपराधों में हो रहा इजाफा और हर तरफ गंदगी के ढेर स्मार्ट सिटी पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे है। आलम ये है कि दोपहर से लेकर शाम तक हर तरफ सड़कों पर जाम के नजारे दिखते हैं। जिस रास्ते पर भी गुजरों बस वाहनों की लंबी कतारें इंतजार करती हैं। विकास का कथित ढोल पीटने वाले सरकार के नुमाइंदों और प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं देता। बस उनके सायरन बजाते वाहन सड़कों पर तेज रफ्तार में दौड़ते दिखाई देते हैं।


वहीं रेलवे स्टेशन एरिया भी जाम से बेहाल है। यहां सुबह का वक्त छोड़ दिया जाए तो दोपहर से शाम और रात तक हालात इतने ज्यादा खराब रहते हैं कि लोग इस रास्ते पर जाने से घबराते हैं। रेलवे स्टेशन का आकार इस कदर बढ़ रहा है कि अब तो लोगों को यह तक अंदाज लगाना मुश्किल हो रहा है कि आखिर स्टेशन का विस्तार कब थमेगा। आमजन शंका करने लगे हैं कि अब स्टेशन के अंदर घुस पाना भी दूभर होगा। निर्माणाधीन रेलवे स्टेशन के आसपास इस कदर अंधकार रहता है कि यात्री को समझ में नहीं आता कि आखिर प्रवेश द्वार कहां है। दूसरी ओर आलम ये है कि जिस एलीवेटेड रोड को विकास का प्रतीक बताया जा रहा है उसने शहर के विकास को सर्वाधिक बदसूरत कर दिया है। इस रोड को शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले फूलबाग से होकर निकाला जा रहा है। इससे वर्षों पुराने इस चैराहे की खूबसूरती अब बची ही नहीं है न ही प्राकृतिक वातावरण का सुकून मिल पा रहा है। एलीवेटेड रोड कब बनकर तैयार होगी और कैसे यहां पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा भविष्य ही बताएगा।

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