दुनिया ने ली राहत की सांस, पर Real Winner कौन?
पेरिस। अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति समझौता तय समय से दो दिन पहले ही साइन हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने वर्चुअल माध्यम से इस ऐतिहासिक डील पर हस्ताक्षर किए। ट्रंप ने इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत करार दिया है। इस समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी दोबारा खोलने पर सहमति बन गई है, जिससे दुनिया के तेल कारोबार पर मंडरा रहा सबसे बड़ा खतरा फिलहाल टल गया है। यह डील 14 सूत्रीय शर्तों के साथ हुई है, लेकिन इसी के साथ एक अहम सवाल जोर पकड़ रहा है आखिर इस समझौते में असली फायदा किसे हुआ? कई रणनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि कागज़ पर भले ही दोनों पक्ष जीते दिख रहे हों, लेकिन सबसे बड़ा फायदा ईरान की झोली में गया है। ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई एक बड़े खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। आइए समझें। अमेरिका के हाथ क्या आया? 14 सूत्रीय इस समझौते में अमेरिका को सबसे बड़ी राहत यह मिली है कि युद्ध का खतरा फिलहाल टल गया। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को नहीं रोकने का भरोसा दिया है, जिसका मतलब है कि दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की सप्लाई फिर से सामान्य होने जा रही है। इससे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आने का खतरा कम हो गया है।
इसके अलावा, ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने की शर्त मान ली है। हालांकि, उसके परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। दोनों देश अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखेंगे और उसी दौरान एक स्थायी समझौते की कोशिश होगी। ट्रंप ने साफ कहा है कि यह एक परफॉर्मेंस बेस्ड डील है, यानी अगर ईरान ने अपने वादे नहीं निभाए तो दी गई रियायतें वापस भी ली जा सकती हैं। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका इस डील के तहत ईरान को कोई सीधा नकद भुगतान नहीं करेगा। ईरान को इस डील में क्या मिला? इस डील में ईरान को जो छूट मिली हैं, वही पूरी तस्वीर को बदल देती हैं। सबसे बड़ा फायदा ईरान के तेल कारोबार को मिला है। डील लागू होते ही ईरान को तेल और ईंधन बेचने की छूट मिलने लगी है। बैंकिंग, शिपिंग और इंश्योरेंस से जुड़े कई प्रतिबंधों में भी राहत का रास्ता खुल गया है। इससे ईरान की आर्थिक स्थिति फिर सुधरेगी और अभी तक प्रतिबंधों के कारण अलग-थलग पड़ा ईरान दुनिया में फिर से अपनी अहमियत बढ़ाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, अगर ईरान युद्ध से पहले वाले स्तर पर तेल बेचता है, तो उसे हर साल 60 अरब डॉलर से अधिक की कमाई हो सकती है। ऊर्जा विशेषज्ञों का अनुमान है कि सिर्फ शुरुआती दो महीनों में ही उसे करीब 8 अरब डॉलर की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। इतना ही नहीं, ईरान के पास पहले से ही 100 मिलियन बैरल से ज़्यादा तेल स्टोरेज में पड़ा है, जिनमें से करीब 60 मिलियन बैरल विदेशों में रखा हुआ है, जिसे अब तुरंत बाज़ार में बिक्री के लिए निकाला जा सकता है। अगर आगे स्थायी समझौता होता है, तो विदेशों में फंसी करीब 100 अरब डॉलर की ईरानी संपत्तियों तक पहुंच का रास्ता भी खुल सकता है। ईरानी मीडिया शुरुआती दौर में 12 अरब डॉलर जारी होने की उम्मीद जता रहा है। इसके साथ ही, युद्ध से बर्बाद हुए ईरान को फिर से विकसित करने के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का प्रस्ताव भी इस डील का हिस्सा बताया जा रहा है।
Comment / Reply From
You May Also Like
Popular Posts
Newsletter
Subscribe to our mailing list to get the new updates!