International व्यापार में रुपये को नई उड़ान: देश के निर्यातक अब भारतीय मुद्रा में कर सकेंगे सौदे
नई दिल्ली। भारतीय निर्यातकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में एक बड़ा बदलाव आया है। केंद्र सरकार ने विदेशी व्यापार के नियमों में संशोधन करते हुए अब भारतीय निर्यातकों को हर सौदे में डॉलर या किसी अन्य विदेशी मुद्रा में भुगतान लेने की अनिवार्यता से मुक्ति दे दी है। वे कई देशों के साथ भारतीय रुपये में भी निर्यात अनुबंध और इनवॉयस तैयार कर सकेंगे और निर्धारित नियमों के तहत भुगतान रुपये में प्राप्त कर सकेंगे। यह पहल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भारतीय रुपये की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे भारतीय मुद्रा को वैश्विक स्वीकार्यता मिल सके। महानिदेशालय सामान्य विदेशी व्यापार (डीजीएफटी) ने 20 अगस्त को विदेश व्यापार नीति 2023 में यह संशोधन किया है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा वर्ष 2023 में जारी विदेशी मुद्रा संबंधी नियमों के अनुरूप है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पात्र निर्यात के बदले अधिकृत बैंकिंग चैनलों से प्राप्त रुपये के भुगतान को अब विदेश व्यापार नीति के तहत मिलने वाले लाभ और निर्यात दायित्वों को पूरा करने के लिए भी मान्यता दी जाएगी। यह निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि पहले केवल विदेशी मुद्रा में प्राप्त भुगतानों को ही इन लाभों के लिए योग्य माना जाता था।
अब तक, भारतीय कंपनियाँ मुख्य रूप से डॉलर, यूरो और पाउंड जैसी प्रमुख विदेशी मुद्राओं में ही भुगतान प्राप्त करती रही हैं। इससे मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव और संबंधित जोखिमों का सामना करना पड़ता था, जो निर्यातकों के लिए अनिश्चितता पैदा करते थे। रुपये में व्यापार की अनुमति पहले भी कुछ विशेष परिस्थितियों में थी, लेकिन नियमों और उससे मिलने वाले लाभ को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं थी। नए बदलावों से इस व्यवस्था को अधिक स्पष्ट और ठोस आधार मिलने की उम्मीद है, जिससे इसका उपयोग अधिक सुलभ और आकर्षक हो जाएगा। नए नियमों के तहत, एशियन क्लियरिंग यूनियन (एसीयू) से बाहर के देशों के साथ भारतीय निर्यातक रुपये या किसी विदेशी मुद्रा में निर्यात अनुबंध और इनवॉयस तैयार कर सकेंगे। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर विदेशी खरीदार अब रुपये में भुगतान करेगा, बल्कि यह एक विकल्प है जहाँ दोनों पक्ष सहमत हों और निर्धारित बैंकिंग तथा नियामकीय शर्तें पूरी हों। रुपये में भुगतान स्वीकार करने से कुछ मामलों में मुद्रा बदलने की लागत और विदेशी मुद्रा से जुड़े जोखिम कम हो सकते हैं, जिससे निर्यातकों के लिए लेनदेन अधिक कुशल बन सकता है।
यह उन देशों के साथ व्यापार में भी सुविधा प्रदान कर सकता है जहाँ डॉलर के माध्यम से भुगतान करना मुश्किल होता है या जहां डॉलर की उपलब्धता सीमित है। नेपाल और भूटान के साथ रुपये की भूमिका पहले से ही स्थापित है और वहां के लिए यह नियम अलग हैं, जबकि एसीयू के सदस्य देशों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के संबंधित नियम लागू रहेंगे। इसके अलावा, सरकार या एक्जिम बैंक की लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत होने वाले निर्यात में भी भारतीय रुपये में इनवॉयस की व्यवस्था की जा सकती है। यह विदेशों में भारतीय कंपनियों और परियोजनाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में रुपये की स्वीकार्यता को बढ़ाने की भारत की कोशिशों को मजबूत करेगा। हालांकि, ईरान जैसे देशों के साथ मौजूदा प्रतिबंध और नियामकीय शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी। यह कदम भारतीय रुपये को वैश्विक मंच पर एक मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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