Jinping, पुतिन और ट्रंप की ऐतिहासिक मुलाकात की तैयारी, शेनझेन में बदल सकता है वैश्विक समीकरण
बीजिंग। नवंबर 2026 में चीन के शेनझेन शहर में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन से पहले दुनिया की तीन बड़ी महाशक्तियों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक संभावित त्रिपक्षीय बैठक को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। यदि यह मुलाकात होती है, तो इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, जो वैश्विक समीकरणों को नया आकार दे सकती है। इस संभावित बैठक को लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार, बीजिंग, मॉस्को और वॉशिंगटन के वरिष्ठ अधिकारी तीनों नेताओं के बीच संभावित मुलाकात को लेकर बातचीत कर रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी इस दिशा में काम जारी रहने के संकेत दिए हैं। प्रस्ताव को लेकर रूस और अमेरिका उत्साहित नजर आ रहे हैं, लेकिन चीन ने अब तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है और सभी पक्षों के साथ संपर्क बनाए रखने की बात कही है।
चीन के लिए यह बैठक कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। अपने देश में अमेरिका और रूस के राष्ट्राध्यक्षों की मेजबानी करके शी जिनपिंग वैश्विक राजनीति में चीन की बढ़ती भूमिका का संदेश देना चाहेंगे। हालांकि, बीजिंग इस बात को लेकर भी सतर्क है कि कहीं इस बैठक के कारण एपेक सम्मेलन का मूल एजेंडा प्रभावित न हो। तीनों नेताओं की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं भी हैं। डोनाल्ड ट्रंप व्यापार घाटे, टैरिफ और अमेरिकी आर्थिक हितों पर जोर दे सकते हैं। व्लादिमीर पुतिन पश्चिमी प्रतिबंधों में राहत और यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस की अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत करने का प्रयास करेंगे। वहीं, शी जिनपिंग का ध्यान चीन की आर्थिक चुनौतियों, अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव और ताइवान के मुद्दे पर केंद्रित रह सकता है। इस प्रस्तावित बैठक के सामने सबसे बड़ी चुनौती आपसी अविश्वास है। चीन को आशंका है कि ट्रंप अपने राजनीतिक हितों के लिए इस मंच का इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि बीजिंग को लगा कि बैठक उसके लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है, तो वह इससे पीछे हट सकता है। ऐसे में संभव है कि तीनों नेताओं की संयुक्त बैठक के बजाय अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ताएं हों। फिलहाल, शेनझेन में होने वाले एपेक सम्मेलन पर दुनिया की निगाहें टिकी हैं। यह बैठक वैश्विक शक्ति संतुलन को नया आकार देगी या केवल कूटनीतिक संवाद तक सीमित रहेगी, इसका फैसला आने वाले दिनों में होगा।
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