
कारों का धुआं 17 प्रतिशत तक बढ़ा देता Dementia का जोखिम
वाशिंगटन। ताजा शोध के अनुसार, पीएम 2.5 (2.5 माइक्रोन से छोटे कण) में मात्र 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की वृद्धि डिमेंशिया का जोखिम 17प्रतिशत तक बढ़ा देती है। अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि वायु प्रदूषण, विशेष रूप से कारों के धुएं से निकलने वाले सूक्ष्म कण, डिमेंशिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। वहीं, कालिख (सूट) जैसे तत्वों के 1 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर स्तर से यह खतरा 13प्रतिशत तक बढ़ सकता है। अध्ययन में बताया गया है कि इस समय दुनिया भर में करीब 5.74 करोड़ लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं और 2050 तक यह आंकड़ा 15.28 करोड़ तक पहुंच सकता है। शोधकर्ताओं ने 51 विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों का विश्लेषण किया, जिनमें 2.9 करोड़ से अधिक लोगों का डेटा शामिल था। इन अध्ययनों का अधिकतर हिस्सा उत्तर अमेरिका, यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों से था।
इनमें वायु प्रदूषकों पीएम 2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कालिख का सीधा संबंध डिमेंशिया के बढ़ते मामलों से जोड़ा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रदूषक मस्तिष्क में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा करते हैं, जो कोशिकाओं और डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे अल्जाइमर और वैस्कुलर डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। वैस्कुलर डिमेंशिया खास तौर पर मस्तिष्क में रक्त प्रवाह की कमी से होता है और इन प्रदूषकों का इस पर गहरा असर देखा गया है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के डॉ. क्रिश्चियन ब्रेडेल का कहना है कि डिमेंशिया की रोकथाम केवल स्वास्थ्य सेवाओं से नहीं हो सकती, इसके लिए शहरी नियोजन, ट्रैफिक नियंत्रण और पर्यावरणीय नीतियों में सुधार जरूरी है।
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