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  • Monday, 21 September 2026
America में बजा मिडटर्म चुनावों का बिगुल, 45 दिन में होगा ट्रंप की किस्मत का फैसला

America में बजा मिडटर्म चुनावों का बिगुल, 45 दिन में होगा ट्रंप की किस्मत का फैसला

  • महंगाई, पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और डांवाडोल अर्थव्यवस्था बने हैं चुनावी मुद्दे

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक किस्मत का फैसला करने वाले मिडटर्म चुनावों का बिगुल बज चुका है और इसके लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है। यह चुनाव तय करेगा कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बचे हुए समय में अमेरिकी संसद पर उनकी रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहेगा या विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी का। इस समय देश में बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल के दाम और डांवाडोल अर्थव्यवस्था चुनावी मुद्दे बने हुए हैं, जो ट्रंप की साख पर सवाल उठा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव का दिन आने में भले ही कुछ दिन बाकी हों, लेकिन अमेरिका के 20 राज्यों ने अपने नागरिकों को डाक के जरिए बैलेट पेपर भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसमें टेक्सास, मिशिगन और नॉर्थ कैरोलिना जैसे राज्य शामिल हैं।

जल्द ही 13 और राज्य भी इसी प्रक्रिया से जुड़ जाएंगे, जिससे 3 नवंबर की तारीख आने से पहले ही करोड़ों नागरिक अपना वोट डाल चुके होंगे। अमेरिका में मेल-इन वोटिंग यानी घर बैठे डाक से वोट देने का क्रेज पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। डाक से वोटिंग के अलावा पोलिंग बूथ पर जाकर खुद वोट डालने यानी अर्ली इन-पर्सन वोटिंग भी कुछ राज्यों में शुक्रवार से शुरू हो गई है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पूरा मिडटर्म चुनाव असल में ट्रंप के कामकाज पर जनता का सीधा फैसला होगा।रिपोर्ट के मुताबिक लाखों लोगों को समय से पहले वोट डालने में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला भी मददगार रहा, जिसने ट्रंप प्रशासन की मेल से वोट देने की प्रक्रिया पर पाबंदियां लगाने की कोशिश को खारिज कर दिया था।

इस फैसले से चुनाव करवा रहे अधिकारियों ने राहत की सांस ली। इस बीच, वोटिंग की शुरुआत का यह समय रिपब्लिकन पार्टी के लिए बहुत अच्छा नहीं माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका की अर्थव्यवस्था को लेकर सामने आए आंकड़े ट्रंप और उनकी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं, महंगाई बेकाबू है, और होम लोन की ब्याज दरें भी आसमान छू रही हैं।


रिपोर्ट के मुताबिक हाउस के स्पीकर माइक जॉनसन जैसे रिपब्लिकन नेता अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर चुनाव हारने का डर नहीं होने का दावा कर रहे हैं, ओपिनियन पोल उनके पक्ष में अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं। रियल क्लियर पॉलिटिक्स के नए ओपिनियन पोल के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी रिपब्लिकन से करीब 9 फीसदी अंकों से आगे है। हाउस में मेजॉरिटी लीडर हकीम जेफरीज का दावा है कि चाहे अर्थव्यवस्था हो, स्वास्थ्य सुविधाएं हों या ईरान के साथ तनाव, हर मोर्चे पर जनता डेमोक्रेट्स की नीतियों पर ज्यादा भरोसा जता रही है।


ट्रंप भी अपनी पार्टी का संसद पर कब्जा बनाए रखने के लिए कई राजनीतिक चालें चल रहे हैं, लेकिन डाक से वोटिंग रोकने की उनकी कोशिश कोर्ट ने नाकाम कर दी है। हैरानी की बात यह है कि ट्रंप खुद भी कई बार डाक के जरिए वोट डाल चुके हैं, लेकिन जनसभाओं में अक्सर मेल-इन वोटिंग की आलोचना करते रहते हैं। आम जनता के बीच डाक से वोट देने का तरीका कोरोना काल के बाद से बेहद पसंदीदा बन गया है और यह मिडटर्म चुनाव तय करेंगे कि आने वाले दो सालों में ट्रंप सरकार आसानी से चला पाएंगे या उन्हें विपक्ष की रुकावटों का सामना करना पड़ेगा।

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