Operation Sindoor और ईरान युद्ध ने पाकिस्तानी सरकार को जीवनदान दे दिया
वॉशिंगटन। पाकिस्तान की पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉ. आयशा सिद्दीका ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर की वजह से पाकिस्तान का शासन ढहने से बच गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सेना नैरेटिव बनाने में कामयाब रही और डोनाल्ड ट्रंप ने उस नैरेटिव को काफी बढ़ाया जिससे पाकिस्तान के शासन को जीवनदान मिल गया। उन्होंने एक पत्रकार से बात करते हुए बताया कि कैसे हाल के क्षेत्रीय संकटों से पाकिस्तान की सेना को नई ताकत मिली है। डॉ. आयशा सिद्दीका किंग्स कॉलेज लंदन में वॉर स्टडीज की सीनियर फेलो हैं और पाकिस्तान की सेना और सरकार के बीच की डार्क स्टोरी पर कई किताब लिख चुकी हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रॉडकास्टर से बातचीत में डॉ. सिद्दीका ने कहा कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी सेना ने कहीं ना कहीं अपनी जनता को बिना सबूत दिए इस बात का विश्वास दिला कि हमने 3-4 राफेल गिरा दिए हैं, जबकि पाकिस्तान की सेना की तरफ से एक भी सबूत नहीं दिए गए और भारत ने कई सारे सबूत दुनिया के सामने रख दिए थे। पाकिस्तानी सेना के इस दावे को ट्रंप ने अपने बयान से बढ़ाया। उन्होंने कभी कहा कि 7 विमान गिरे, कभी 8 विमान गिरे तो कभी 10 विमान गिरे और इससे पाकिस्तानी सेना के नैरेटिव को बल मिला।
उन्होंने कहा कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पहले पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की सरकार और सेना के खिलाफ देश में जबरदस्त गुस्सा था। इमरान खान के समर्थकों ने सेना और सरकार का जीना मुहाल कर रखा था लेकिन पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर ने ऑपरेशन सिंदूर को अपने फायदे के लिए भुनाया। डॉ. आयशा ने इस्लामाबाद मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर बातचीत में पाकिस्तान की अहम भूमिका का जिक्र किया और कहा कि इससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने में मदद मिली। उनका कहना है कि इस मध्यस्थता की वजह से पाकिस्तान की सरकार खुद को एक जिम्मेदार ग्लोबल प्लेयर और मिडिल ईस्ट के अहम देश के तौर पर पेश कर पाई जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि में जबरदस्त सुधार हुआ। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सरकार की छवि बहुत शानदार और बेहतरीन उभरी है, लेकिन इस प्रतिष्ठा के बावजूद असल फायदे के तौर पर उसे एक पैसा भी नहीं मिला। पाकिस्तान में शहबाज शरीफ और असीम मुनीर के खिलाफ फैले गुस्से पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी शासन की पतंग उड़ने की वजह ऑपरेशन सिंदूर की मेहरबानी है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ संघर्ष के बाद ईरान युद्ध शुरू हो गया जिसका असर पूरी दुनिया पर हो रहा था। भारत की अर्थव्यवस्था भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रही थी और ऐसे में समय में शहबाज और मुनीर ने मध्यस्थता की कोशिश की और ट्रंप को इस बात के लिए मनाया कि ईरान पर हमला ना करें और उससे बात करें। इससे पाकिस्तानी की छवि को सुधार हुआ। डॉ. आयशा ने कहा कि पाकिस्तान को आर्थिक तौर पर एक ढेला भी नहीं मिला तो फिर तालियां कैसे बजाएंगे? लेकिन इसका फायदा पाकिस्तानी शासन को ये होगा कि दुनिया भर में उनकी स्वीकार्यता बढ़ गई है। जैसे ईयू की नेता काजा कल्लास जब इस्लामाबाद आईं तो पहले पाकिस्तान में मानवाधिकार पर सवाल पूछे जाते थे ईशनिंदा पर सवाल पूछे जाते थे लेकिन इस बार काजा कल्लास ने ऐसा कोई सवाल नहीं पूछा और असीम मुनीर को यही चाहिए। क्योंकि उन्हें लगता है कि वही देश की इकोनॉमी को चला सकते हैं। इसीलिए ऑपरेशन सिंदूर और ईरान युद्ध ने पाकिस्तानी शासन को जीवनदान दे दिया है।
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