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  • Thursday, 06 August 2026
दुनिया की 35 प्रतिशत बंदूक संबंधित मौतें अमेरिका में: Report

दुनिया की 35 प्रतिशत बंदूक संबंधित मौतें अमेरिका में: Report

न्यूयार्क। अमेरिका में रोजाना 130 से अधिक लोग फायरआर्म्स से होने वाली चोटों के कारण अपनी जान गंवाते हैं, चाहे वह आत्महत्या हो या मामूली झगड़ों में गोलीबारी। अमेरिका लगातार बंदूक हिंसा की घटनाओं से जूझ रहा है, जहां आइडाहो के ट्विन फॉल्स और सिएटल जैसी जगहों पर हाल ही में कई लोगों की जान जा चुकी है। ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया की 35 प्रतिशत बंदूक संबंधित मौतें अमेरिका में होती हैं, लेकिन यह राष्ट्र 235 साल पुराने एक कानूनी पेच में फंसा हुआ है। इस समस्या की जड़ अमेरिका के संविधान का दूसरा संशोधन है, जो 1791 में आया था। यह संशोधन नागरिकों को आत्मरक्षा के लिए बंदूक रखने का संवैधानिक अधिकार देता है। यहीं से व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामूहिक सुरक्षा के बीच एक विवादास्पद बहस छिड़ जाती है, जिसमें अक्सर व्यक्ति के अधिकार को प्राथमिकता दी जाती है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट भी बंदूक अधिकारों की रक्षा करता है, और यहां के लोग इसे एक समस्या के बजाय स्वतंत्रता और आत्मरक्षा के अधिकार के रूप में देखते हैं। देश में बंदूक संस्कृति इतनी गहरी है कि नागरिकों के पास लगभग 40 करोड़ बंदूकें हैं, जो आबादी से भी अधिक हैं।


महामारी और सामाजिक अनिश्चितता के दौर में हथियारों की बिक्री में भारी तेजी आई है, जिससे इनकी पहुंच और भी आसान हो गई है। कई राज्यों में कमजोर नियंत्रण, बिना कड़े लाइसेंस के हथियार ले जाने की अनुमति और निजी व ऑनलाइन बंदूक बिक्री पर संघीय स्तर पर पृष्ठभूमि जांच का अभाव इस समस्या को और गंभीर बनाता है। मानसिक तनाव, कुंठा, आर्थिक असमानता और घरेलू कलह जैसे सामाजिक कारण भी लोगों को हिंसा की ओर धकेलते हैं, जबकि कुछ सामूहिक गोलीबारी करने वाले लोग प्रसिद्धि की चाह में ऐसी वारदातों को अंजाम देते हैं।


पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे बड़े नेता भी संविधान के दूसरे संशोधन और बंदूक रखने के अधिकार का समर्थन करते रहे हैं। ट्रंप ने तो अपने कार्यकाल में बंदूक नियमों में व्यापक कटौती की घोषणा की थी, जिससे ऑनलाइन खरीद जैसी प्रक्रियाएं और भी आसान हो गईं। नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरए), जो 1871 में स्थापित हुआ था, एक शक्तिशाली गन लॉबी है। यह संगठन बंदूक नियंत्रण के किसी भी प्रयास को रोकने के लिए करोड़ों डॉलर का चुनावी फंड खर्च करता है। एनआरए का तर्क है कि समस्या बंदूक रखने में नहीं, बल्कि उसके गलत इस्तेमाल में है। यह राजनीतिक विभाजन स्पष्ट है, जहां डेमोक्रेट सख्त राष्ट्रीय कानून, जैसे असॉल्ट राइफलों पर प्रतिबंध और व्यापक पृष्ठभूमि जांच की वकालत करते हैं, वहीं रिपब्लिकन हथियारों के अधिकार को आत्मरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का प्रतीक मानते हैं।

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